Madhya Pradesh News : सुड़गांव नल-जल योजना पर बारिश का रौद्र रूप, कुएं में घुसा बाढ़-नाले का पानी
नल खोलते ही निकल रहा मटमैला पानी, ग्रामीणों में बीमारी का डर; ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ब्यूरो चीफ इन्द्रमेन मार्को मंडला मध्यप्रदेश
मंडला जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विकासखंड मोहगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत सुड़गांव के पोषक ग्राम डोंगरगांव में संचालित नल-जल योजना इन दिनों बारिश के कारण गंभीर संकट में है। लगातार बारिश के चलते बाढ़ और नाले का पानी नल-जल योजना के लिए बनाए गए कुएं के अंदर समा गया है। इसके कारण नल-जल योजना के माध्यम से ग्रामीणों के घरों तक पहुंचने वाला पानी पूरी तरह मटमैला और गंदा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार बारिश के बाद नाले और आसपास का पानी सीधे नल-जल योजना के कुएं में पहुंच गया है। कुएं में दूषित पानी के प्रवेश के बाद योजना के माध्यम से आने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। नल खोलते ही निकल रहा मटमैला पानी ग्रामीणों का कहना है कि नल-जल योजना से मिलने वाले पानी में मिट्टी और गंदगी दिखाई दे रही है। कई जगह पानी इतना मटमैला बताया जा रहा है कि उसे देखकर ही ग्रामीण पीने से परहेज कर रहे हैं। इसके बावजूद जिन परिवारों के पास पेयजल का दूसरा विकल्प नहीं है, उन्हें मजबूरी में इसी पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बारिश के मौसम में दूषित पानी से संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में पेयजल की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराया जाना जरूरी है।

बारिश ने खोली नल-जल योजना की व्यवस्था की पोल ग्रामीणों के मुताबिक नल-जल योजना का उद्देश्य घर-घर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है, लेकिन बारिश के दौरान जलस्रोत में ही बाढ़ और नाले का पानी पहुंच जाने से योजना की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि नल-जल योजना के कुएं में आसानी से नाले और बाढ़ का पानी प्रवेश कर रहा है तो जलस्रोत की सुरक्षा के लिए पहले से क्या व्यवस्था की गई थी? क्या कुएं के चारों ओर पर्याप्त सुरक्षा एवं जल निकासी की व्यवस्था है? यदि नहीं, तो बारिश से पहले इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? ग्राम पंचायत पर अनदेखी का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि नल-जल योजना से गंदा पानी आने की जानकारी होने के बावजूद ग्राम पंचायत सुड़गांव द्वारा समस्या के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल नल-जल योजना के कुएं का निरीक्षण कराया जाए, कुएं में प्रवेश कर रहे नाले और बाढ़ के पानी को रोका जाए तथा कुएं की साफ-सफाई कराई जाए।

पानी का सैंपल लेकर हो जांच ग्रामीणों ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि नल-जल योजना के पानी का तत्काल सैंपल लेकर प्रयोगशाला में जांच कराई जाए। पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पानी पीने योग्य है या नहीं।इसके साथ ही ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक नल-जल योजना का पानी सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक गांव में वैकल्पिक रूप से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए। जिम्मेदारों से ग्रामीणों का सवाल नल-जल योजना पर लाखों रुपये खर्च कर ग्रामीणों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब योजना का जलस्रोत सुरक्षित रहे। यदि बारिश का पानी और नाले का दूषित पानी सीधे कुएं में पहुंच रहा है तो यह ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है। अब ग्रामीणों की नजर संबंधित विभाग के अधिकारियों और ग्राम पंचायत पर है कि वे इस समस्या का संज्ञान लेकर कुएं की सफाई, जलस्रोत की सुरक्षा, पानी की जांच और दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान कब तक करते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके पर जांच कराई जाए और सुड़गांव-डोंगरगांव के लोगों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
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