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कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर में एलनीनो के प्रभाव में दलहनी फसलों की खेती अपनाएं किसान, कम वर्षा में वैज्ञानिकों ने दी नई रणनीति

कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर में एलनीनो के प्रभाव में दलहनी फसलों की खेती अपनाएं किसान, कम वर्षा में वैज्ञानिकों ने दी नई रणनीति

 

मनकापुर, गोण्डा।

एलनीनो के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर होने और सामान्य से कम वर्षा होने की स्थिति में किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस.के. वर्मा ने बताया कि कम वर्षा को ध्यान में रखते हुए खेती की रणनीति तैयार करना वर्तमान समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एलनीनो के कारण खरीफ फसलों की बुवाई एवं धान की रोपाई में विलंब हुआ है। ऐसे में धान की रोपाई के बजाय सीधी बुवाई अधिक लाभकारी रहेगी। वरिष्ठ वैज्ञानिक (शस्य विज्ञान) डॉ. रामलखन सिंह ने किसानों को नरेंद्र-97, नरेंद्र-118, शुष्क सम्राट, सहभागी तथा सीओ-51 जैसी कम अवधि की धान की प्रजातियों की सीधी बुवाई करने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि कम वर्षा की स्थिति में अरहर, उड़द, मूंग, लोबिया तथा तिल जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की कम अवधि वाली किस्मों का चयन करना अधिक उपयुक्त रहेगा। उड़द की पंत उर्द-09 किस्म मात्र 75 दिनों में तैयार हो जाती है। दलहनी फसलों के बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर बोने से उत्पादन में वृद्धि होती है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए किसानों को सलाह दी गई कि फसल बुवाई के दो-तीन दिन के भीतर पेडीमेथलीन 30 ईसी की लगभग 1.25 लीटर प्रति एकड़ मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

वरिष्ठ फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. अजीत सिंह वत्स ने बताया कि कम वर्षा के दौरान मूंग एवं उड़द में पीला चित्रवर्ण रोग फैलाने वाली सफेद मक्खी से बचाव के लिए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार कीटनाशी का छिड़काव करें।

वहीं डॉ. हनुमान प्रसाद पांडे ने किसानों को खेतों में कार्बनिक खाद, जिंक सल्फेट एवं पोटाश उर्वरकों के संतुलित प्रयोग की सलाह देते हुए बताया कि खड़ी फसल में 2 प्रतिशत यूरिया, 2 प्रतिशत पोटाश, 1 प्रतिशत पोटेशियम क्लोराइड तथा 2 प्रतिशत डीएपी के घोल का छिड़काव करने से पैदावार बढ़ती है। साथ ही खेतों को खरपतवार मुक्त रखने और पलवार (मल्चिंग) अपनाकर मिट्टी की नमी संरक्षित रखने की भी सलाह दी।

उन्होंने गन्ने में ड्रिप सिंचाई तथा बागवानी फसलों में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने पर जोर दिया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक (पशुपालन) डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं।

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम और कम वर्षा की परिस्थितियों में वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती अपनाकर किसान उत्पादन एवं आय दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं।

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