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Chhattisgarh News : कोरबा: स्थानीय अनुभवी बेरोजगार युवाओं ने उठाई रोजगार में प्राथमिकता की मांग, नई ठेका कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

कोरबा (छत्तीसगढ़)। कोयला खदान प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं और विभिन्न बेरोजगार संगठनों ने नई ठेका कंपनियों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बरमपुर, बाकी मोंगरा, गेवरा बस्ती, कुसमुंडा सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं, जिन्होंने वर्षों तक खदानों एवं निजी ठेका कंपनियों में ऑपरेटर, ड्राइवर, मैकेनिक और सुपरवाइजर के रूप में कार्य कर व्यावहारिक अनुभव हासिल किया है। स्थानीय युवाओं का कहना है कि वर्तमान में भी क्षेत्र के अनेक अनुभवी युवा सोनू-मोनू कंपनी, नीलकंठ कंपनी सहित अन्य निजी ठेका कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और अपनी कार्यकुशलता सिद्ध कर चुके हैं। ऐसे में जब KNR जैसी नई कंपनियां क्षेत्र में कार्य शुरू करती हैं, तो स्थानीय अनुभवी युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने से उनमें असंतोष बढ़ रहा है।

भू-विस्थापितों के रोजगार और अन्य प्रभावित परिवारों का मुद्दा

स्थानीय संगठनों का कहना है कि SECL और कोल इंडिया की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीति के तहत भूमि देने वाले भू-विस्थापितों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि उनका दावा है कि विभिन्न तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से सभी प्रभावित परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। युवाओं का कहना है कि खदान प्रभावित क्षेत्रों की बड़ी आबादी ऐसी है, जिसकी आजीविका खनन परियोजनाओं से प्रभावित हुई है, लेकिन उन्हें प्रत्यक्ष रोजगार का लाभ नहीं मिला। ऐसे युवाओं ने निजी कंपनियों में कार्य कर माइनिंग का अनुभव प्राप्त किया है और अब वे नई परियोजनाओं में भी अवसर चाहते हैं।

स्थानीय युवाओं की प्रमुख मांगें

स्थानीय प्रतिनिधियों एवं बेरोजगार युवाओं ने मांग की है कि—

  • स्थानीय अनुभवी युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता दी जाए।
  • KNR और SECL भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
  • खदान प्रभावित क्षेत्रों के सभी बेरोजगार युवाओं के हित में समग्र रोजगार नीति तैयार की जाए।
  • निजी कंपनियों में स्थानीय युवाओं के लिए एक निर्धारित कोटा सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनके अनुभव और कौशल का उचित उपयोग हो सके।

स्थानीय युवाओं का कहना है कि यदि क्षेत्र में बड़े औद्योगिक और खनन प्रोजेक्ट स्थापित होते हैं, लेकिन स्थानीय प्रशिक्षित और अनुभवी युवाओं को रोजगार नहीं मिलता, तो विकास का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। फिलहाल इस संबंध में SECL अथवा KNR कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय युवाओं को अब प्रबंधन के निर्णय और आगामी भर्ती प्रक्रिया का इंतजार है।

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