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Uttar Pradesh News पीडब्ल्यूडी चौराहे पर तालाब बना गड्ढा, राहगीरों की जान पर खतरा

राख परिवहन की बेलगाम गाड़ियों से जर्जर हुई सड़कें, बड़ी दुर्घटना की आशंका; जिम्मेदार विभाग मौन

रिपोर्टर चन्द्रिका प्रसाद उत्तर प्रदेश

शक्तिनगर (सोनभद्र)। शक्तिनगर परिक्षेत्र में मध्य प्रदेश से आने वाले फ्लाई ऐश (राख) परिवहन करने वाले भारी वाहनों के लगातार आवागमन से ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें बदहाल होती जा रही हैं। जगह-जगह बने गहरे गड्ढे लोगों के लिए परेशानी के साथ-साथ दुर्घटना का कारण भी बन रहे हैं। सबसे अधिक खराब स्थिति शक्तिनगर के पीडब्ल्यूडी चौराहे की है, जहां सड़क के बीच बना विशाल गड्ढा बरसात में तालाब का रूप ले चुका है।स्थानीय लोगों के अनुसार यह मार्ग क्षेत्र का प्रमुख संपर्क मार्ग है, जिससे प्रतिदिन ज्वालामुखी धाम जाने वाले श्रद्धालुओं सहित सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं।

बरसात के कारण गड्ढे में पानी भर जाने से वाहन चालकों को उसकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है। कई बाइक और स्कूटी सवार गड्ढे में फंसकर गिर चुके हैं और चोटिल भी हुए हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि मध्य प्रदेश स्थित एनटीपीसी विंध्यनगर क्षेत्र से राख लेकर आने वाले ओवरलोड वाहनों के लगातार संचालन से सड़क की स्थिति तेजी से खराब हुई है। भारी वाहनों के दबाव के कारण सड़क उखड़ गई है और कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।


इस संबंध में जब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित सड़क एनटीपीसी सिंगरौली के अधीन है और इसकी मरम्मत का कार्य उसी संस्था द्वारा कराया जाना है। वहीं दूसरी ओर एनटीपीसी की ओर से भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने संबंधित विभागों से तत्काल गड्ढों की मरम्मत कराने, ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण लगाने तथा सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभागों की उदासीनता के कारण आम जनता रोजाना जोखिम उठाकर इस मार्ग से गुजरने को मजबूर है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे और इस जानलेवा गड्ढे से लोगों को राहत मिलेगी।

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