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Chhattisgarh News : महा-खुलासाः कोरबा कंप्यूटर कॉलेज (KCC) में छात्रों के साथ बड़ी धोखाधड़ी

घंटाघर स्थित प्रतिष्ठित कॉलेज के 'दीक्षा कोर्स' पर उठे गंभीर सवाल ! यूनिवर्सिटी के नाम पर चल रहा है खेल, RTI ने खोली दावों की पोल !

ब्यूरोचीफ राकेश कुमार साहू जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़

अगर आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य कोरबा में कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहा है, तो यह खबर आपके लिए आंखें खोलने वाली है। शिक्षा के नाम पर छात्रों के भविष्य और उनके माता-पिता की गाढ़ी कमाई से कैसे खिलवाड़ किया जाता है, इसका एक सनसनीखेज मामला कोरबा कंप्यूटर कॉलेज (केसीसी), घंटाघर से सामने आया है। क्या है पूरा मामला? कोरबा कंप्यूटर कॉलेज द्वारा छात्रों को ‘दीक्षा कोर्स’ नाम का एक कंप्यूटर पाठ्यक्रम कराया जा रहा है। इस कोर्स को करने वाले छात्रों को जो रिजल्ट (प्रमाण पत्र) दिया जाता है, उसमें बड़े अक्षरों में लिखा होता है कि यह कॉलेज ‘अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर)’ से संबद्ध (Affiliated) है। छात्र इसी भरोसे में रहते हैं कि उन्हें यूनिवर्सिटी स्तर की डिग्री या डिप्लोमा मिल रहा है। mRTI (सूचना के अधिकार) में हुआ सबसे बड़ा ब्लास्ट ! जब इस कोर्स की प्रामाणिकता पर शक हुआ, तब एक जागरूक नागरिक ने सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 (RTI) का इस्तेमाल किया। उन्होंने सीधे अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर से इस ‘दीक्षा कोर्स’ के लिए मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों की आधिकारिक सूची मांगी। विश्वविद्यालय के जन सूचना अधिकारी ने जो लिखित जवाब दिया, उसने पूरे कॉलेज प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है: पत्र क्रमांकः 1248/ सु. का. अ./2025 दिनांक: 20/02/2025 यूनिवर्सिटी का साफ़ जवाबः “विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में इस ‘दीक्षा कोर्स’ की कोई संबद्धता (Affiliation) होना रिकॉर्ड में नहीं पाया गया है।”


कॉलेज की चालाकीः खुद लिखा-‘सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं’ खेल सिर्फ यूनिवर्सिटी के नाम के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। कॉलेज प्रबंधन ने खुद को कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए रिजल्ट के एक कोने में चुपके से लिख दिया है:”This certificate is not valid for any government job” (यानी यह प्रमाण पत्र किसी भी सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं है)।
शिकायत के बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन मौन, नहीं हुई कोई कार्रवाई!इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद युवा आरटीआई कार्यकर्ता उदित कुमार ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत और पुख्ता सबूत अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के आला अधिकारियों को सौंपे हैं। लेकिन बेहद शर्मनाक बात यह है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने बड़े गंभीर मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा हुआ है। शिकायत दर्ज होने के बाद भी अब तक कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं!
बड़ा सवाल यह है किः
1. अगर यह कोर्स किसी सरकारी नौकरी के काम का ही नहीं है, तो छात्रों को एडमिशन के समय यह सच खुलकर क्यों नहीं बताया गया?
2. जब बिलासपुर यूनिवर्सिटी ने इस ‘दीक्षा कोर्स’ को मान्यता ही नहीं दी, तो रिजल्ट के ऊपर यूनिवर्सिटी का नाम छापने का अधिकार इस कॉलेज को किसने दिया?
3. इस अमान्य और गैर-संबद्ध कोर्स के रिजल्ट पर महाविद्यालय के प्राचार्य (Principal) की सील और उनके हस्ताक्षर धड़ल्ले से क्यों किए जा रहे हैं? क्या प्राचार्य खुद इस भ्रामक गतिविधि के जिम्मेदार नहीं हैं?
इन तीखे सवालों का जवाब कौन देगा?
1. यूनिवर्सिटी के नाम की आड़ लेकर छात्रों से जो हजारों रुपए की फीस वसूली गई, उसकी भरपाई कौन करेगा?
2. छात्रों का जो कीमती समय और साल बर्बाद हुआ, उसका जिम्मेदार कौन है?
3. क्या कोरबा जिला प्रशासन, कलेक्टर महोदय , उच्च शिक्षा विभाग, व संबंधित विश्विद्यालय के द्वारा इस मामले का संज्ञान लेकर कॉलेज पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करेंगे?

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