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Madhya Pradesh News परमात्मा अपने नाम में ही निवास करता है। नाम में नामी यूं बसे ,जो पुष्प में सुवास। युग- युग का है राम सहेला, राम भक्त नहीं रहे अकेला ।

कलयुग में नाम साधना ही सर्वश्रेष्ठ साधना है। राम- नाम सब तीर्थ स्थान, राम-राम जप परम स्नान।

रिपोर्टर रवि धाकड़

ये विचार ग्राम भंवरा में आयोजित एकदिवसीय अमृतवाणी राम नाम सत्संग में श्री राम शरणम् आश्रम देवास से पधारे श्री इंद्र सिंह नागर भाई जी ने व्यक्त किए । जो श्री अमृतवाणी से हैं ।भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं कि हे !अर्जुन तू हर समय मेरा स्मरण कर,तू सब कठिनाईयों से तर जाएगा। जो जन अंत समय में या मरते समय भी मेरा स्मरण कर ले तो उसे मेरा धाम सुलभ हो जाता हैं। जन्म-जन्मांतर के पुण्य उदय होते हैं तब कथा सत्संग सुनने का अवसर मिलता है ।राम शरणम् ऐसी आध्यात्मिक संस्था है जहां संतों ने आज तक किसी से एक पैसा भी नहीं लिया ।ना दिखावा है, ना आडंबर है ,ना चंदा है ना चढ़ावा है ।इसी प्रकार से 100 वर्ष पूर्ण हो गए हैं । अमृतवाणी पाठ एवं सुमधुर भजनों से श्रोता भावविभोर हो उठे । कार्यक्रम मैं पधारे हुए समस्त साधकों का आभार ग्राम भंवरा के साधकों ने माना और यह समाचार श्री राम शरणम् के प्रादेशिक प्रचार प्रमुख डॉ सुरेश गुर्जर ने प्रसारित किया।

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