Uttar Pradesh News दरगाह हजरत कदम रसूल के सज्जादा नशीन बाबा लाल शाह कादरी क्या हुआ लंबी बीमारी के चलते निधन इंतकाल

रिपोर्टर वसीउद्दीनआगरा उत्तर प्रदेश
आगरा बोदला दरगाह कदम रसूल नबी के सज्जादा नशीन हजरत बाबा लाल शाह कादरी का लंबी बीमारी के चलते निधन इंतकाल आज हो गया बाबा लाल शाह कादरी के निधन की खबर सुनते ही शहर के सूफी संतों में दुख की लहर दौड़ गई अस्ताना ए मैकश खानकाह कादरिया चिश्तिया नियाज़िया मेवा कटरा के सज्जादा नशीन हजरत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह कादरी चिश्ती जाफरी नियाजी ने कहा है कि बाबा लाल शाह कादरी ने अपना पूरा जीवन दरगाह हजरत नबी करीम कदम रसूल की खिदमत करते हुए लगा दिया जिस तरह से बाबा लाल शाह कादरी अशरफी का स्वभाव था कि जो भी उनके पास जाता हुए रसूले खुदा हजरत मुहम्मद साहब की हदीस जरूर सुनते थे आज उनके निधन से सूफियत को बड़ा नुकसान हुआ है जश्ने ईद मिलादुन्नबी 12 वफात में दरगाह कदम रसूल के उर्स मुबारक को बड़े ही शान शौकत के साथ मानते थे कदम रसूल पर जितने भी जुलूस ए मोहम्मदी पहुंचते थे उनका स्वागत बाबा लाल शाह कादरी बड़े ही अदब और एतराम से किया करते थे सूफी संतों में बड़ा नाम बाबा लाल शाह कादरी का अब सिर्फ उनकी यादें ही बाकी रह गई बाबा लाल शाह कादरी को मिठाकुर मैं वार्ड नमाज ईशा आज दफनाया जाएगा वही दरगाह हजरत सैयदना औलिया बाबा रहमतुल्ला आले छिपी टोला कै सज्जादा नशीन मियां मुहम्मद हुसैन रशीदी ने कहा कि बाबा लाल शाह कादरी सूफी संतों में अपना एक अलग मकाम रखते थे मुझे कई मौके बाबा लाल शाह कादरी के साथ ऐसे भी मिले कि हम दोनों ने दरगाहों के उर्स मुबारक कई एक साथ किया बाबा लाल शाह कादरी हमेशा मुझसे अपनी औलाद की तरह मिलते थे अपने से छोटा होने के बावजूद भी हमेशा बाबा लाल शाह कादरी ने अपने से आगे रखा वह मुझसे कहते थे कि एक सज्जादा नशीन का महत्व मुझे पता है कि क्या होना चाहिए जबकि खुद बाबा लाल शाह कादरी उस दरगाह कदम रसूल के सज्जादा नशीन थे कि जिनकी उम्मत में अल्लाह तबारक ताला ने हमको पैदा कर दुनिया में भेजा दरगाह कदम रसूल पर अल्लाह के प्यारे नबी हजरत मोहम्मद साहब के कदम मुबारक है

बहुत बड़ी शक्ति बाबा लाल शाह कादरी के इस दुनिया से जाने से सूफियत को हुई है जिसकी भरपाई अब कभी भी नहीं हो सकती वही खानकाह चिश्तिया साबरिया बालूगंज खोया गली के सज्जाद नशीन हाजी कासिम अली शाह चिश्ती साबरी रमजानवी ने कहा कि बाबा लाल शाह कादरी साहब को मैंने हमेशा अपने पिता अलहाज रमजान अली शाह चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह आले दरगाह आगरा क्लब में ऐसे देखा कि मानो वह दोनों एक दूसरे से कुछ सिखाते हो मैं उसे समय मैं बहुत छोटा था तो मैं भी सूफी संतो वाली बातें सुनने के लिए उनके पास ही बैठ जाया करता था मेरे पिता हाजी रमजान अली शाह चिश्ती साबरी हमेशा मुझसे कहते थे कि मेरे दुनिया से चले जाने के बाद बाबा लाल चौक कादरी ही तुमको सूफी संतो वाली शिक्षा देंगे इस बात को लेकर दोनों में तकरार होती थी कि रमजान साहब इस तरह की बातें आप हमसे ना कहा करें क्योंकि जो मकाम आपका सूफी संतों में है वह मकाम तक पहुंचाना मेरे लिए नामुमकिन होगा आपका बच्चा मेरे लिए मेरे बच्चों की तरह है वह मुझसे हमेशा बाबा लाल शाह कादरी कहा करते थे कि जब भी कोई बात मेरे लायक हो तो मेरे पास जरूर चल कर आना और मुझे पूछना क्योंकि तुम्हारे पिता से ही मैंने बहुत कुछ सीखा है यह उनका बड़पन मेरे वालिद के लिए मुझे बहुत पसंदीदा था आज मेरे पिता के बाद मेरे सर से मेरे पिता समान बुजुर्ग का साया सर से उड़ गया है बाबा लाल शाह कादरी जैसी शख्सियत अब इस दुनिया में नहीं आएगी उनकी कमी समूचे शहर के सूफी संतों को बहुत सताएगी




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