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Chhattisgarh News गेवरा माइंस बनी समंदर! PNC कंपनी की लापरवाही से कीचड़ में डूबीं गाड़ियां।

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में शुमार गेवरा खदान से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने वहाँ काम कर रही (पीएनसी) कंपनी के दावों और उनकी तैयारियों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही खदान परिसर को एक खतरनाक दलदल और समंदर में तब्दील कर दिया है। ​वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खदान के भीतर चारों तरफ सिर्फ पानी और कीचड़ का सैलाब उमड़ रहा है। करोड़ों रुपये की भारी-भरकम गाड़ियां और डंपर इस कीचड़ में रेंगने को मजबूर हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
​पानी निकासी का कोई जुगाड़ नहीं, भगवान भरोसे मजदूर! ​हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद, खदान के भीतर से पानी निकासी का कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। नियम कहते हैं कि मानसून से पहले खदानों में पानी निकासी के लिए विशेष पंप और नालियों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि काम सुचारू रूप से चल सके और मजदूरों की जान जोखिम में न पड़े। लेकिन PNC कंपनी ने इन तमाम नियमों को ताक पर रख दिया।

​मुख्य बिंदु जो खड़े करते हैं बड़े सवाल: मजदूरों की जान से खिलवाड़: खदान के रास्ते पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। विजिबिलिटी (दृश्यता) बेहद कम है, जिससे डंपर चालकों के लिए गाड़ियां चलाना मौत को दावत देने जैसा है। ​करोड़ों का नुकसान, काम ठप: पानी भरा होने के कारण कोयला परिवहन पूरी तरह बाधित हो रहा है, जिससे न सिर्फ कंपनी बल्कि राजस्व को भी भारी नुकसान हो रहा है। ​प्रबंधन की चुप्पी: इस बदहाली के बाद भी कंपनी प्रबंधन गहरी नींद में सोया हुआ है। क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रबंधन की नींद टूटेगी? ​ग्राउंड रिपोर्ट: खदान के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि हर साल करोड़ों का टर्नओवर करने वाली कंपनी पानी निकालने का एक छोटा सा जुगाड़ तक नहीं कर पाई। ​अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने के बाद माइनिंग विभाग और प्रशासन पीएनसी कंपनी पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर अधिकारियों की साठगांठ से इस लापरवाही को ऐसे ही दबा दिया जाएगा।

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