Jharkhand News कतरी नदी में एक पुल टूटा, दूसरे से जारी ट्रांसपोर्टिंग; कार्रवाई पर उठे सवाल
अवैध पुल पर आधी कार्रवाई या बचाव की रणनीति? कतरी नदी मामले में जवाबदेही की मांग तेज

ब्यूरो चीफ मिथिलेश पांडे धनबाद झारखण्ड
धनबाद कतरास: कतरी नदी में अवैध रूप से बनाए गए अस्थायी पुलों और नदी क्षेत्र में अतिक्रमण के मामले में की गई कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं। एक ओर बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा एक अस्थायी पुल को ध्वस्त कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर दूसरे पुल से अब भी भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने से कार्रवाई की निष्पक्षता पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। गौरतलब है कि रविवार को जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने अंगारपथरा ओपी क्षेत्र अंतर्गत गजलीटांड़ स्थित कतरी नदी का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि नदी में अलग-अलग स्थानों पर सीमेंटेड पाइप और बड़े पीपा पाइप डालकर अस्थायी पुलों का निर्माण किया गया है, जिनका उपयोग भारी वाहनों के आवागमन तथा ओवरबर्डन (ओबी) परिवहन के लिए किया जा रहा है। विधायक ने नदी की प्राकृतिक धारा को बाधित करने को पर्यावरण और स्थानीय जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा था कि इस मामले को विधानसभा सत्र और संबंधित समितियों में उठाया जाएगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही थी। विधायक के निरीक्षण के बाद बीसीसीएल प्रबंधन सक्रिय हुआ और मंगलवार को एक अस्थायी पुल को ध्वस्त कर नदी में डाले गए पाइप और ओबी को हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई गई। हालांकि, आरोप है कि आरके माइनिंग ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा बनाए गए दूसरे पुल से अब भी भारी वाहनों की ट्रांसपोर्टिंग जारी है।

मामले को लेकर बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने कहा कि यदि कंपनी द्वारा स्वयं पुल को तोड़ा गया है तो यह स्पष्ट संकेत है कि निर्माण कार्य वैध नहीं था। उन्होंने कहा कि नदी की धारा को अवरुद्ध कर पुल निर्माण करना प्रकृति और पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ है, जिसे किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने अवैध पुल निर्माण कराने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए कहा कि यदि शेष पुल को भी शीघ्र नहीं हटाया गया तो मामले की शिकायत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से की जाएगी। स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि जब एक पुल को अवैध मानकर तोड़ा गया, तो दूसरे पुल से अब तक परिवहन क्यों जारी है। इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह कार्रवाई केवल औपचारिकता या कानूनी दायित्वों से बचने का प्रयास तो नहीं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में व्यापक जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं या फिर अन्य मामलों की तरह यह मुद्दा भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।




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