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Chhattisgarh News कोरबा जिला शिक्षा अधिकारी ऑफिस बना RTI का ‘कब्रिस्तान’ – प्रथम अपील लगते ही खुलता है ‘सेटिंग का बाजार’

ब्यूरो चीफ उदित कुमार कोरबा छत्तीसगढ़

कोरबा :- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 जिस मकसद से बना था – पारदर्शिता और जवाबदेही – उसी का गला घोंटा जा रहा है जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोरबा में। RTI आवेदनों दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यहां भ्रष्टाचार छिपाने के लिए कानून को ही बंधक बना लिया गया है। आपको बताते चले कि स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम स्कूल पाली में हुए लाखों का हुआ भ्रष्टाचार की सत्यता जानने के लिए RTi कार्यकर्ता बादल दुबे के द्वारा अधिनियम के तहत विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया था! किंतु जन सूचना अधिकारी प्राचार्य स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम स्कूल पाली के द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही करते हुए RTi कानून को ही ठेंगा दिखा दिया गया! जबकि RTI एक्ट धारा 7 कहती है 30 दिन में जानकारी दो।अन्यथा निःशुल्क जानकारी देनी होगी तथा जानकारी प्रदान करने से इनकार किया गया है माना जाएगा । प्राचार्य से जानकारी नही मिलने पर आवेदक के द्वारा अधिनियम के अनुसार प्रथम अपील जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय कोरबा में प्रस्तुत किया गया! वर्तमान में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का केंद्र DEO कोरबा के द्वारा प्रथम अपील सुनवाई का अचानक इका एक सुनवाई पत्र जारी कर आवेदक के व्हाट्सएप नंबर में भेज कर उपस्थित होने कह दिया गया!जिसके संदर्भ में आवेदक के द्वारा अधिनियम के कानून का जिक्र करते हुए हवाला देते हुए द्वितीय सुनवाई अवसर प्रदान करने हेतु लिखित आवेदन RTi शाखा प्रभारी को भेजा गया

किन्तु प्रथम अपील RTi शाखा प्रभारी व जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा के द्वारा RTi अधिनियम कानून का मजाक बनाते इनकार करते हुए प्राचार्य स्वामी आत्मानन्द अंग्रेजी माध्यम स्कूल पाली के पक्ष में इकतरफा फैसला आदेश जारी कर दिया गया!आपको बताते चले कि Deo कार्यालय कोरबा में प्रथम अपील सुनवाई पत्र जारी करने की समय सीमा तय ही नही है! जब मर्जी हो सुनवाई नही तो महीनों अलमारी में धूल खाते पड़े रहते हैं! निष्पक्ष जांच होने पर कई खुलासे होंगे!शायद Deo कोरबा जवाबदेही शब्द से पूरी तरह अनजान है! जबकि अधिनियम कानून में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रथम अपील आवेदन का 45 दिन की समयावधि में सुनवाई करना निर्धारित है! तथा प्रथम अपील सुनवाई हेतु उपस्थित होने के लिए आवेदक को 2 अवसर तथा विशेष परिस्थितियों में 3 अवसर भी प्रदान किया जाता है परन्तु यहाँ का कार्य शैली ही नियम कानून से ऊपर है । यहाँ जैसे ही प्रथम अपील दायर होती है, वैसे ही अंदरखाने सेटिंग शुरू हो जाता था।

जानकारी दबाने उजागर न हो तरह तरह के तरीके अपनाए जाते हैं!और फैसले? RTi का कानून देखकर नहीं, ‘पहचान’ व चेहरे देखकर होते हैं। अपने करीबियों का केस/अपील तुरंत अपने पक्ष में फैसला हो जाता है।भ्रष्टाचार से जुड़े बिल, वाउचर, नियुक्ति की जानकारी मांगे जाने पर जवाब आता है “धारा 8(1)(j) – व्यक्तिगत जानकारी”। मतलब घोटाले की फाइल भी ‘पर्सनल’ हो गई। कानून की मंशा व उदेद्श्य को ही पलट दिया गया।यहाँ आपको अवगत कराते चले कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सी.पी.आई.वो. विरुद्ध सुभाष चन्द्र अग्रवाल केस में कहा था – भ्रष्टाचार की जानकारी सार्वजनिक होगी।साथ ही उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ एवं केंद्रीय सूचना आयोग CIC ने दर्जनों बार आदेश दिए। सारे आदेशों जजमेंट को कोरबा DEO तथा RTI शाखा प्रभारी कहते हैं “हम नहीं मानते”। ये सीधी न्यायिक अवमानना है।शायद DEO कोरबा एवं RTi शाखा प्रभारी माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर हो गए हैं! जो आदेशों,जजमेंट को खुलेआम चुनोतियाँ देने का कार्य कर रहे है! इस सारे विषय पर बादल दुबे RTi कार्यकर्ता कोरबा का कहना है कि सारे मय दस्तावेज के साथ जल्द ही भारतीय संसद द्वारा पारित कानून का उल्लंघन करने व माननीय उच्चतम न्यायालय, केंद्रीय सूचना आयोग के आदेशों का अवमानना के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा साथ ही RTi शाखा प्रभारी Deo कोरबा की शिकायत जल्द ही देश तथा राज्य की सक्षम कार्यालय व अधिकारियों के समक्ष लिखित रूप में की जाएगी!!

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