Madhya Pradesh News गोवंश की लगातार मौतों से बढ़ी चिंता, खुले में फेंके जा रहे मेडिकल और रासायनिक कचरे की जांच की उठी मांग

ब्यूरो चीफ नीरज वर्मा शिवपुरी मध्य प्रदेश
गौ सेवक कल्लू महाराज ने प्रशासन पर उठाए सवाल, गौशाला निर्माण और गोवंश संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री से की विशेष पहल की मांग शिवपुरी जिले के दिनारा क्षेत्र में लगातार सामने आ रही गोवंशों की मौतों ने ग्रामीणों, गौ सेवकों और सामाजिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। गोवंशों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर सक्रिय गौ सेवक कल्लू महाराज ने शासन-प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि क्षेत्र में मेडिकल कचरा, एक्सपायरी दवाइयां, डेयरी उत्पादों में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थ, होटलों और नाश्ता केंद्रों का अपशिष्ट तथा पॉलिथीन जैसी हानिकारक सामग्री खुले स्थानों पर फेंकी जा रही है, जिससे निराश्रित गोवंशों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। कल्लू महाराज ने कहा कि दिनारा एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश खुले में घूमते हैं और भोजन की तलाश में कचरे के ढेरों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में यदि कचरे में जहरीले रसायन, प्लास्टिक, मेडिकल वेस्ट या खराब खाद्य सामग्री मौजूद हो तो उसके सेवन से पशुओं के बीमार होने और उनकी मौत होने की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने दावा किया कि हाल के दिनों में क्षेत्र में कई गायें असामान्य व्यवहार करती हुई दिखाई दी हैं तथा कथित रूप से विषैले पदार्थों के सेवन के कारण अब तक पांच गोवंशों की मौत हो चुकी है।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग गौ सेवक कल्लू महाराज ने शिवपुरी कलेक्टर, खाद्य सुरक्षा विभाग, पशुपालन विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि मेडिकल स्टोरों की एक्सपायरी दवाइयों का निस्तारण किस प्रकार किया जा रहा है और क्या निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने डेयरी संचालकों, होटल व्यवसायियों, नाश्ता केंद्रों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों के निपटान की भी जांच कराने की आवश्यकता बताई है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था नियमों का उल्लंघन कर खुले में कचरा फेंक रही है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। दिनारा में गौशाला नहीं होना बना चिंता का विषय कल्लू महाराज ने दिनारा जैसी बड़ी पंचायत में आज तक स्थायी गौशाला का निर्माण नहीं होने पर भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में निराश्रित गोवंशों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके संरक्षण और देखभाल के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं हैं। यदि क्षेत्र में व्यवस्थित गौशाला स्थापित हो जाए तो बड़ी संख्या में बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है और उन्हें कचरे के ढेरों में भोजन तलाशने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि दिनारा क्षेत्र में शीघ्र गौशाला निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए तथा गोवंश संरक्षण के लिए विशेष योजना लागू की जाए। साथ ही गौवंशों के उपचार, चारे और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जनजागरण अभियान की चेतावनी गौ सेवक कल्लू महाराज ने कहा कि यदि गोवंशों की मौतों को लेकर गंभीर पहल नहीं की गई और जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो गौ सेवक एवं सामाजिक संगठन व्यापक जनजागरण अभियान चलाने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि पशु संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे मेडिकल कचरा, प्लास्टिक, रासायनिक पदार्थ और अन्य हानिकारक सामग्री खुले में न फेंकें तथा पशुओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में सहयोग करें।

प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी क्षेत्रवासियों की नजर गोवंशों की मौतों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक कारणों का पता लगाया जाना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही, नियमों के उल्लंघन या अवैध तरीके से कचरा निस्तारण की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए तो न केवल गोवंशों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। वहीं गौ सेवकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि गोवंशों की लगातार हो रही मौतों को रोका जा सके और पशु संरक्षण के प्रति लोगों का विश्वास कायम रह सके।


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