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Uttar Pradesh News जोनिहा में धड़ल्ले से चल रहे अवैध नर्सिंग होम, जिम्मेदारों की चुप्पी से मरीजों की जिंदगी खतरे में

ब्यूरो प्रमुख शरद कुमार फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

फतेहपुर।* गर्मी का मौसम शुरू होते ही जिले के शहरों से लेकर कस्बों और गली-मोहल्लों तक अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप क्लिनिकों की बाढ़ सी आ गई है। बिंदकी तहसील क्षेत्र के जोनिहा कस्बे में बिना मानक, बिना पंजीकरण और बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के दर्जनों नर्सिंग होम व क्लिनिक खुलेआम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में ये अवैध अस्पताल गरीब और भोली-भाली जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं? कस्बे में कई ऐसे नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं जहां न तो स्वास्थ्य विभाग का रजिस्ट्रेशन है और न ही इलाज के लिए जरूरी संसाधन। इसके बावजूद मरीजों को भर्ती कर ड्रिप चढ़ाई जा रही है, प्रसव कराए जा रहे हैं और गंभीर बीमारियों का इलाज तक किया जा रहा है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन अवैध क्लिनिकों में अनुभवहीन लोग डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। कई जगहों पर फार्मासिस्ट और कंपाउंडर ही डॉक्टर की भूमिका निभा रहे हैं। जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है, जबकि सुविधाएं शून्य हैं। गर्मी के मौसम में डायरिया, बुखार और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ते ही ऐसे क्लिनिकों की चांदी हो जाती है।हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर कार्रवाई के दावे जरूर करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। विभागीय छापेमारी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति होती है और कुछ दिनों बाद वही अवैध अस्पताल फिर से चालू हो जाते हैं।सूत्रों की मानें तो कई अवैध नर्सिंग होम बिना फायर सेफ्टी, बिना प्रशिक्षित स्टाफ और बिना आपातकालीन सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं। यहां तक कि प्रसव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया भी असुरक्षित माहौल में कराई जा रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्साधिकारी से मांग की है कि जोनिहा कस्बे में संचालित अवैध नर्सिंग होम और क्लिनिकों की उच्चस्तरीय जांच कराकर तत्काल सीलिंग की कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसे संचालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए जो लोगों की जान जोखिम में डालकर अवैध कमाई कर रहे हैं।जनता का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा तो किसी दिन बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग इन अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई करता है या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी यूं ही लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती रहेगी।

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