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Chhattisgarh News छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र से एक बेहद परेशान करने वाली तस्वीर सामने आ रही है। यहाँ जीटीपी (GTP) कंपनी द्वारा बनाई जा रही एक नई सड़क स्थानीय ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। विकास के नाम पर किए जा रहे इस निर्माण कार्य ने अब एक बड़ी आफत का रूप ले लिया है, जिससे कई परिवारों के आशियाने दांव पर लग गए हैं।

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

मिट्टी के पहाड़ों के बीच दफन होते घर

कंपनी द्वारा सड़क बनाने के लिए जिस जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके ठीक बगल में मौजूद ग्रामीणों के घर अब मलबे के नीचे दबने की कगार पर हैं। हालांकि कंपनी ने सीधे तौर पर मकानों को ध्वस्त नहीं किया है, लेकिन घरों के चारों तरफ मिट्टी के ऊँचे-ऊँचे पहाड़ खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। अगर आने वाले दिनों में तेज बारिश होती है, तो यह मिट्टी धंसने से कोई भी बड़ी अनहोनी घट सकती है और लोगों की जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।

नियमों को ताक पर रखकर दोबारा शुरू हुआ काम

हैरानी की बात यह है कि इस सड़क के निर्माण पर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद, अब बिना किसी स्पष्ट अनुमति या प्रशासनिक आदेश के कंपनी ने अपने निजी स्वार्थ के लिए काम फिर से शुरू कर दिया है। मौके पर भारी मशीनें जैसे जेसीबी, उत्खननकर्ता (Excavator) और डंपर धड़ल्ले से काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

करोड़ों के राजस्व का नुकसान और अवैध खनन का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, जीटीपी कंपनी पर सड़क निर्माण के नाम पर दर्जनों ट्रिप मिट्टी का अवैध खनन और परिवहन करने का गंभीर आरोप है। इस अवैध कारोबार से सरकार को राजस्व (Revenue) का एक बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि बने मूकदर्शक

इस संकट से जूझ रहे प्रभावित लोगों ने न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाया है। वार्ड पार्षद से लेकर पुलिस और जिला प्रशासन तक अपनी पीड़ा पहुँचाई गई, लेकिन हर जगह से केवल आश्वासन और मायूसी ही हाथ लगी है।

बड़ा सवाल: क्या सुशासन का दावा करने वाली सरकार का प्रशासनिक ढांचा इतना लाचार हो चुका है कि वह एक रसूखदार कंपनी के सामने नतमस्तक है? आखिर किसकी शह पर जिम्मेदार विभाग इस पूरे तमाशे को मूकदर्शक बनकर देख रहा है?
​अब देखना यह होगा कि क्या कोरबा प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर गरीब ग्रामीणों को न्याय दिलाता है, या फिर किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार किया जा रहा है।

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