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Rajasthan News बौली-मित्रपुरा में अकीदत के साथ अदा की गई बकरीद की नमाज, मांगी अमन-चैन की दुआ

रिपोर्टर सूरजमल वैष्णव सवाई माधोपुर राजस्थान

रिपोर्टर/सूरज मल वैष्णव /सवाई माधोपुर/उपखंड क्षेत्र के बौली और मित्रपुरा में आज बकरीद का त्योहार अकीदत और सौहार्द के साथ मनाया गया। मुस्लिम समाज के लोगों ने ईदगाह और मस्जिदों में नमाज अदा कर क्षेत्र में अमन-चैन व खुशहाली की दुआएं मांगी।

मित्रपुरा स्थित ईदगाह में सुबह बकरीद की विशेष नमाज अदा की गई। इसी प्रकार बौली में खिरनी रोड, पापड़ा स्थित ईदगाह पर सुबह 8 बजे काजी बदरुद्दीन ने नमाज पढ़ाई। इस दौरान बौली कस्बे सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिद और ईदगाह पहुंचे।

नमाज के बाद इमाम ने मुल्क की तरक्की, आपसी भाईचारे, बारिश और क्षेत्र की खुशहाली के लिए विशेष दुआ कराई। नमाज अदा करने के बाद सभी ने एक-दूसरे से गले मिलकर “ईद मुबारक” कहा और बधाई दी।

क्या है ईद-उल-अजहा
इसे ईद-उल-अजहा या कुर्बानी वाली ईद भी कहते हैं। यह इस्लाम का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने जिलहिज्जा की 10 तारीख को मनाते हैं। इसी महीने हज यात्रा भी होती है।

क्यों मनाते हैं? – कुर्बानी की कहानी
यह त्योहार हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के त्याग और अल्लाह के प्रति समर्पण की याद में मनाया जाता है।

कुरान के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए उनसे सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने को कहा। हजरत इब्राहिम ने अपने इकलौते बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी का फैसला लिया।

जब उन्होंने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके जज्बे को कबूल करते हुए इस्माइल की जगह जन्नत से एक दुम्बा यानी मेमना भेज दिया। तभी से कुर्बानी की परंपरा शुरू हुई और इसी की याद में मुसलमान कुर्बानी देते हैं।

यह त्योहार त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देता है।

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