Madhya Pradesh News स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का अकाल
बदहाल पड़े वाटर कूलर, गंदगी के बीच पानी पीने को मजबूर मरीज

ब्यूरो चीफ नीरज वीरम शिवपुरी मध्य प्रदेश
पोहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्थाओं ने खोली स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल
BMO पर लापरवाही के आरोप, ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग
पोहरी। भीषण गर्मी के दौर में जहां सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं पोहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की बदहाल व्यवस्थाएं इन दावों की वास्तविकता उजागर करती नजर आ रही हैं। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर समस्या अस्पताल की पेयजल व्यवस्था को लेकर सामने आई है, जहां लंबे समय से खराब पड़े वाटर कूलर मरीजों की परेशानी का कारण बने हुए हैं।
अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएं, छोटे बच्चे और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज शामिल रहते हैं। भीषण गर्मी में जहां स्वच्छ और ठंडा पेयजल सबसे जरूरी सुविधा मानी जाती है, वहीं अस्पताल में इसकी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। मरीजों और उनके परिजनों को या तो गंदगी के बीच पानी पीना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में बाहर से महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
रखरखाव के अभाव में कबाड़ बने वाटर कूलर
अस्पताल परिसर में लगे अधिकांश वाटर कूलरों की हालत बेहद खराब दिखाई दे रही है। कई वाटर कूलरों के बाहरी हिस्सों पर जंग लग चुका है, जबकि पानी निकलने वाले हिस्सों पर मोटी गंदगी जमा हो गई है। पानी एकत्र होने वाली ट्रे में काली काई, कीचड़ और सड़ी हुई गंदगी साफ दिखाई दे रही है। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण इन उपकरणों से दुर्गंध आने लगी है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि कई वाटर कूलरों से लगातार पानी रिस रहा है। रिसाव के कारण आसपास की जमीन दलदल जैसी हो गई है। गंदा पानी जमा होने से मच्छरों का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो सकता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की गंदगी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़
इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीज पहले से ही बीमारी और कमजोरी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में दूषित वातावरण और अस्वच्छ पेयजल उनकी सेहत के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। मरीजों के परिजनों का कहना है कि कई बार मजबूरी में उन्हें गंदे परिसर से ही पानी लेना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब परिवारों के लिए बाहर से पानी खरीदना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। कई मरीज घंटों अस्पताल में उपचार और जांच के लिए रुकते हैं, लेकिन उन्हें साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही। लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन को समस्या की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
सफाई व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। वाटर कूलरों के आसपास फैली गंदगी, जलभराव और बदबू के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर कचरा और गंदा पानी जमा होने से वातावरण अस्वस्थकारी बन चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल परिसर में इस प्रकार की गंदगी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकती है। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।
BMO पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने पोहरी BMO नवलकिशोर अग्रवाल पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी से लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। मरीजों को स्वच्छ पानी जैसी आवश्यक सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल में खराब पड़े वाटर कूलरों की तत्काल मरम्मत कराई जाए अथवा नए वाटर कूलर लगाए जाएं। साथ ही पूरे परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाकर जलभराव और गंदगी को समाप्त किया जाए।


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