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Chhattisgarh News जांजगीर-चांपा में खाकी हुई बेखौफ: “रिपोर्ट नहीं लिखूंगा” – मुलमुला TI पारस पटेल ने रोती महिला को थाने से भगाया, 8 दिन अस्पताल में भर्ती पीड़िता बोली- ‘सरपंच ने मारा, पुलिस ने दुत्कारा’

जांजगीर-चांपा। जिले के मुलमुला थाना क्षेत्र से पुलिस की संवेदनहीनता का शर्मनाक मामला सामने आया है। एक महिला को पहले गांव के सरपंच और उसके परिवार ने जमीन विवाद में बेरहमी से पीटा, फिर जब वो न्याय के लिए थाने पहुंची तो थाना प्रभारी पारस पटेल ने FIR लिखने से इनकार कर दिया और धमकाकर भगा दिया। पीड़िता का वीडियो अब वायरल हो रहा है जिसमें वो थाना प्रभारी के सामने रो-रोकर कार्रवाई की गुहार लगा रही है।

क्या है पूरा मामला
अकलतरा ब्लॉक के ग्राम मुरलीडीह की रहने वाली शिलादेवी राय का आरोप है कि गांव के सरपंच कमलेश पाटले, उनके भाई सुम्मत पाटले और बेटे करण पाटले ने जमीन हड़पने की नीयत से उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। लाठी-डंडों से हुई पिटाई में शिलादेवी बुरी तरह घायल हो गईं। हालत बिगड़ने पर उन्हें बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जहां 5 दिन इलाज चला। इसके बाद भी पूरी तरह ठीक न होने पर 3 दिन तक निजी अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। कुल 8 दिन तक शिलादेवी अस्पताल के बिस्तर पर रहीं।

गांव छोड़ने को मजबूर हुआ परिवार
पीड़िता ने बताया कि मारपीट के दौरान आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने और गांव से भगा देने की धमकी दी। घटना के बाद से पूरा परिवार डर के साए में है और गांव छोड़कर अकलतरा के अमोरा में शरण लेकर रह रहा है।

थाने में नहीं सुनी गई फरियाद, VIDEO वायरल
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब शिलादेवी न्याय की उम्मीद में मुलमुला थाना पहुंचीं तो वहां उन्हें और जिल्लत झेलनी पड़ी। पीड़िता का आरोप है कि थाना प्रभारी पारस पटेल ने उनकी शिकायत सुनने के बजाय यह कहकर भगा दिया कि “10 दिन बाद आई हो, अब कौन रिपोर्ट लिखेगा”।

पीड़िता द्वारा मीडिया को दिए गए वीडियो में साफ दिख रहा है कि वो थाना प्रभारी पारस पटेल के सामने हाथ जोड़कर रोते हुए FIR दर्ज करने की मांग कर रही है। लेकिन थाना प्रभारी का जवाब था- “तुम्हारा रिपोर्ट नहीं लिखूंगा”। वीडियो में थाना प्रभारी का रवैया बेहद रुखा और धमकी भरा नजर आ रहा है।

SP-IG से गुहार के बाद भी कार्रवाई नहीं
मुलमुला थाने से निराश होकर पीड़िता ने जांजगीर एसपी कार्यालय और बिलासपुर आईजी को लिखित शिकायत सौंपी। मेडिकल रिपोर्ट समेत सभी दस्तावेज भी दिए। लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी न तो FIR दर्ज हुई और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। आरोपी आज भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक महिला 8 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही और उसके पास मेडिकल के पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं, तो पुलिस FIR दर्ज करने से क्यों बच रही है? क्या मुलमुला थाना प्रभारी पारस पटेल पर गांव के सरपंच का कोई दबाव है? जब इस घटना का वीडियो अब सार्वजनिक हो चुका है, तब भी पुलिस के आला अफसर चुप क्यों हैं? क्या जांजगीर-चांपा में एक गरीब पीड़ित महिला को न्याय दिलाना अब इतना मुश्किल हो गया है कि उसे थाने से ही दुत्कार कर भगा दिया जाए?

फिलहाल पीड़िता शिलादेवी राय न्याय की आस में अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रही है। वीडियो वायरल होने के बाद अब सबकी नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है।

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