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बालू लिंक एक्सप्रेस, रेत राइडर जोड़ी, शहर में रहने वाला फिर से गांव आ गया क्योंकि रात गहराते ही जाग जाता है कमीशन रेत वाला सिस्टम”!

 

नगरी-सिहावा में आधी रात के बाद दौड़ती हाइवा, जंगल में खड़ी रहती अगली खेप… सफेद कार और ‘कमीशन जोडी की चर्चा से गर्म इलाका

 

दिन में शांत दिखने वाला नगरी-सिहावा क्षेत्र इन दिनों रात के अंधेरे में किसी “सीक्रेट कॉरिडोर” की तरह चर्चा में है। गांवों से लेकर चौक-चौराहों तक लोग धीमी आवाज में एक ही सवाल पूछ रहे हैं —

“आखिर इतनी रात में रेत से भरी हाइवा किसके भरोसे फर्राटे भर रही हैं?”

क्षेत्र में चर्चा है कि रात 11 बजे के बाद जैसे ही सड़कें सुनसान होती हैं, वैसे ही शुरू होता है कथित “रेत रूट ऑपरेशन”। बताया जा रहा है कि पूरा सिस्टम इतनी चालाकी से चलता है कि एक गाड़ी खाली होने तक दूसरी लोड हाइवा जंगल या अंधेरे रास्तों में स्टैंडबाय मोड पर खड़ी रहती है। फिर इशारा मिलते ही अगली खेप रवाना हो जाती है।

लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि इस पूरे खेल में कुछ ऐसे चेहरे सक्रिय हैं जो कमीशन कमाने के लिए खुद को इतना प्रभावशाली बताते हैं कि ठेकेदारों से खुलेआम कहते फिरते हैं —

“कोई कार्रवाई नहीं होगी कोई परेशान नहीं करेगा ऊपर तक पहुंच है कोई बीट पास मंगे तो मिनटों में बन जाएगा

कमीशन के लिए रेत को बेचने के लिए सफेद रंग की चर्चित कार भी इलाके में कौतूहल का विषय बनी हुई है। देर रात अलग-अलग मार्गों पर उसका दिखना अब लोगों के बीच “सिस्टम की निशानी” जैसा बताया जा रहा है।

चाय दुकानों और चौपालों में लोग मजाक में कहने लगे हैं —

“जहां रात में सफेद कार दिखे, समझो आसपास कहीं रेत वाला रास्ता जरूर खुला है और दो उस कार में सवार रहते हैं

सबसे ज्यादा चर्चा उस “ कमीशन जोडी” की हो रही है, जिसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया है। जिन चेहरों को कभी एक-दूसरे पर तंज कसते और पीठ पीछे बयानबाजी करते देखा जाता था, वही अब कथित तौर पर एक ही गाड़ी, एक ही रूट और एक ही सिस्टम के हिस्से के रूप में नजर आने लगे हैं।

इलाके में लोग इसे नाम दे रहे हैं —

“दुश्मनी से डायरेक्ट पार्टनरशिप तक!

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में चल रहे इस कथित नेटवर्क ने अब “सिस्टम” का रूप ले लिया है, जहां हर गाड़ी का समय तय है, हर रास्ते की खबर पहले से है और हर सवाल का जवाब तैयार बताया जाता है।

अब बड़ा सवाल यही है —

क्या जिम्मेदार विभागों को सच में कुछ दिखाई नहीं दे रहा,

या फिर रात के अंधेरे में कोई ऐसा खेल चल रहा है जिसकी आवाज सिर्फ हाइवा की गड़गड़ाहट में दबकर रह जा रही है?

फिलहाल नगरी-सिहावा में एक लाइन सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है —

“दिन में सन्नाटा… रात में रेत का साम्राज्य!”

Indian Crime News

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