गन्ना फसल में खरपतवार व कीट प्रबंधन पर वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
गन्ना फसल में खरपतवार व कीट प्रबंधन पर वैज्ञानिकों ने दी जानकारी

गोण्डा, मनकापुर ।आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर, गोण्डा के वैज्ञानिकों द्वारा शुक्रवार को विकास खंड मनकापुर के ग्राम पचपुती जगतापुर में गन्ना फसल का भ्रमण कर किसानों को सामयिक कृषि कार्यों की जानकारी दी गई।
वरिष्ठ वैज्ञानिक शस्य विज्ञान डॉ. रामलखन सिंह ने किसानों को गन्ना फसल में खरपतवार प्रबंधन, सिंचाई प्रबंधन, उर्वरक प्रबंधन एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गन्ना फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए समय-समय पर गुड़ाई करना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए नियमित सिंचाई करने की सलाह दी गई।
उन्होंने किसानों को बताया कि सिंचाई के बाद उचित नमी की अवस्था में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग कर गुड़ाई कर मिट्टी चढ़ानी चाहिए। साथ ही जून माह तक यूरिया की अवशेष मात्रा का प्रयोग अवश्य कर लेना चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि दानेदार यूरिया के स्थान पर नैनो यूरिया का प्रयोग अधिक लाभकारी सिद्ध हो रहा है। इसके अतिरिक्त नैनो डीएपी का छिड़काव गन्ना बुवाई के 60 एवं 90 दिन बाद करना चाहिए।
वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ने में लगने वाले जड़ बेधक, तना बेधक एवं प्ररोह बेधक कीटों के नियंत्रण के उपाय भी बताए। इसके लिए क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एससी की 150 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ 400 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ना फसल की जड़ों के पास ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई।
डा. ज्ञानदीप गुप्ता ने किसानों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने पर बल देते हुए कहा कि इससे फसल की लागत कम होने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
इस अवसर पर प्रगतिशील कृषक नरेंद्र कुमार यादव, मनोज यादव, श्रीमती रज्जन देवी सहित अन्य किसान उपस्थित रहे और वैज्ञानिकों से खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।



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