कोयलांचल में खाकी पर हमला: अंदरूनी ‘सेटिंग’ पर उठे बड़े सवाल

👉धनबाद में कोयला माफिया बेखौफ, एएसआई पर हमला बना सिस्टम पर सवाल
👉जब अपने ही छोड़ दें साथ: झरिया में पुलिस पर हमला और ‘सेटिंग’ की चर्चा
👉कोयले की काली कमाई में खाकी पर दाग? एएसआई हमला कांड से मचा हड़कंप
धनबाद | झरिया कोयलांचल से बड़ी खबर
धनबाद के झरिया कोयलांचल क्षेत्र में एएसआई अनुज कुमार और उनकी पत्नी पर हुए हमले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर चल रही कथित ‘सेटिंग’ और सांठगांठ को भी उजागर कर दिया है। केंदुआडीह इलाके में हुई इस घटना को लेकर पूरे जिले में चर्चा का माहौल है।
बताया जा रहा है कि एएसआई अनुज कुमार अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ सक्रिय थे। इसी दौरान उन पर और उनकी पत्नी पर हमला किया गया। इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अपराधियों का मनोबल इतना ऊंचा कैसे हो गया कि वे एक पुलिस अधिकारी को ही निशाना बनाने लगे।
👉 ‘मौन सहमति’ की चर्चा, सिस्टम पर सवाल
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि झरिया क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार बिना स्थानीय पुलिस की जानकारी या सहमति के संभव नहीं है। चर्चा है कि हाईवा वाहनों से खुलेआम कोयला उतारने जैसे काम थाने की नजरों से छिपे नहीं रहते।
यही वजह है कि जब स्पेशल टीम द्वारा कार्रवाई की कोशिश की गई, तो माफियाओं ने इसका विरोध करते हुए सीधे एएसआई पर हमला कर दिया। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या विभाग के अंदर ही कहीं न कहीं सहयोग मिल रहा है।
👉 पुलिस महकमे की अंदरूनी कलह उजागर?
इस घटना ने पुलिस विभाग के भीतर संभावित गुटबाजी और असहयोग को भी उजागर किया है। चर्चा यह भी है कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाता, जिससे वे असुरक्षित हो जाते हैं।
एएसआई अनुज कुमार के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें पर्याप्त बैकअप मिला था या वे सिस्टम के भीतर ही अकेले पड़ गए।
👉आला अधिकारियों तक पहुंचती है आंच?
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि अवैध कोयला कारोबार से होने वाली कमाई का हिस्सा ऊपर तक पहुंचता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटना के बाद ऐसे सवाल खुलकर सामने आने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि अगर उच्च स्तर से सख्ती होती, तो अपराधियों की हिम्मत नहीं होती कि वे पुलिस पर हमला करें।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कुछ संदिग्धों की पहचान की जा रही है और छापेमारी की बात कही जा रही है। हालांकि, अब सबकी नजर इस बात पर है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहती है या सिस्टम के भीतर बैठे जिम्मेदार लोगों पर भी गाज गिरती है।
यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर की कमजोरियों और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। अगर समय रहते इस ‘सेटिंग’ को खत्म नहीं किया गया, तो कानून का खौफ खत्म होने का खतरा बढ़ सकता है।


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