बाल विवाह पर अब सख्त कार्रवाई होगी, नरेंद्र पाणिग्राही

बस्तर जिला को “बाल विवाह मुक्त जिला” बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने ठोस पहल शुरू की है। शासन का उद्देश्य है कि प्रदेश के सभी जिले इस सामाजिक कुप्रथा से मुक्त हों और हर बालक-बालिका को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिले। बाल कल्याण समिति (प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अधिकार प्राप्त न्यायपीठ) बस्तर के अध्यक्ष नरेंद्र पाणिग्राही ने कहा कि “बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक अपराध है, जो बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाता है। यह कानून का उल्लंघन है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। बाल कल्याण समिति का प्रयास है कि हर पंचायत, हर मोहल्ला और हर गांव में जागरूकता पहुंचे। समाज की भागीदारी से ही बस्तर को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि बाल विवाह रोकने में जब तक लोग स्वयं आगे आकर सूचना नहीं देंगे, तब तक इस कुप्रथा को समाप्त नहीं किया जा सकता।

बाल कल्याण समिति ने समाज से अपील कि है यदि आपके आसपास बाल विवाह की कोई तैयारी या संदेह हो, तो तुरंत पुलिस, चाइल्डलाइन 1098 या महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचित करें। यह समाज का दायित्व है कि अपने बच्चों को समय से पहले विवाह के बंधन में न बाँधे। हर बच्चा पढ़े, बढ़े और सशक्त बने विभाग द्वारा गांव-गांव, स्कूलों और आंगनबाड़ियों में बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जावेगी। बाल विवाह “बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006″ के तहत गंभीर अपराध है। बालक की आयु सीमा विवाह के समय 21 वर्ष एवं बालिका 18 वर्ष से कम नहीं होना चाहिए। 18 वर्ष से कम आयु की बालिका से विवाह करने वाला पुरुष को दंडनीय अपराध का दोषी माना जाएगा। जो कोई व्यक्ति या समाज प्रमुख बाल विवाह संपन्न कराता है, वह भी दोषी है। माता-पिता, अभिभावक, रिश्तेदार या कोई भी व्यक्ति जो बाल विवाह कराने में सहायता या प्रोत्साहन देता है, उसके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी। इन अपराधों पर दो वर्ष तक का कारावास अथवा एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। बस्तर जिले में अब बाल विवाह कराने, प्रोत्साहित करने या उसमें भाग लेने वालों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। पुलिस, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति सभी मिलकर निगरानी रखेंगे। कोई भी सूचना मिलने पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार की स्पष्ट मंशा है कि हर जिला “बाल विवाह मुक्त” घोषित हो।



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