आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: पीड़ितों को मुआवजा देना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी

👉डॉग बाइट मामलों में बड़ा आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने तय की राज्य सरकारों की जवाबदेही
👉सड़कों पर कुत्ते, खतरे में लोग: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा संदेश, मुआवजा अनिवार्य
👉कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी, डॉग बाइट पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
👉जन सुरक्षा बनाम भावुकता: आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने खींची सख्त लकीर
नई दिल्ली।
देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश देते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि कुत्ते के काटने से यदि कोई व्यक्ति घायल होता है या उसकी मृत्यु होती है, तो संबंधित राज्य सरकार को पीड़ित या परिजनों को मुआवजा देना होगा।
जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सड़कों पर कुत्तों को भोजन कराने वाले लोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते।
👉अदालत ने कहा— “यदि कुत्तों से इतना लगाव है तो उन्हें अपने घरों में रखें, सार्वजनिक सड़कों पर छोड़ने से आम लोग भय और खतरे में रहते हैं।”
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी द्वारा मामले को भावनात्मक दृष्टिकोण से रखने पर कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “संवेदनशीलता केवल पशुओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, लोगों के जीवन और सुरक्षा की प्राथमिकता सर्वोपरि है।”
👉गौरतलब है कि 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दे चुका है। इसके साथ ही सरकारी और सार्वजनिक भवनों में कुत्तों के प्रवेश पर भी रोक लगाई गई थी।
देश के विभिन्न हिस्सों में हाल के महीनों में कुत्तों के हमलों से बच्चों और बुजुर्गों की मौत की घटनाओं ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जन स्वास्थ्य, सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अब सभी राज्य सरकारों पर इस आदेश को सख्ती से लागू करने और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी।

Subscribe to my channel