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Himachal Pradesh News सतयुगी तीर्थ रेणुकाजी मे महाअष्टमी पर आग लगने से खंडित हुई माता की मूर्ति

प्रतिमा खंडित होना अशुभ संकेत मान रहे हैं अधिकतर श्रद्धालु

रिपोर्टर राजेंद्र सिंह सिरमौर हिमाचल प्रदेश

अंतरराष्ट्रीय मेले के अलावा सहस्त्रधारा में मौजूद छोटे मंदिर की सुध नहीं लेता है सिरमौर प्रशासन

संगड़ाह। सतयुगी तीर्थ कहलाने वाले हिमाचल का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री रेणुकाजी के परिक्रमा मार्ग मे सहस्त्रधारा अथवा दूधिया पाणी नामक स्थान पर स्थित माता की प्रतिमा आज आग लगने से खंडित हो गई। यहां से गुजर रहे स्थानीय श्रद्धालु इंद्र प्रकाश गोयल ने बताया कि, परिक्रमा के दौरान वह यहां प्रसाद रूपी जल गृहण करने के लिए रुके तो माता की मूर्ति के पास से धुआं निकल रहा था और श्रंगार व चुनरी जल चुकी थी। गीले कपड़े से उन्होंने आग को ज्यादा फैलने से रोका। घटना के घंटों बाद भी लाखों लोगों की आस्था से जुड़े इस स्थान की सुध लेने रेणुकाजी विकास बोर्ड अथवा सिरमौर जिला प्रशासन का कोई कर्मचारी न पंहुचने पर लोगों ने नाराजगी भी जताई। गौरतलब है कि, प्रशासन केवल अंतरराष्ट्रीय मेले के दौरान इस जगह को सजाने संवारने का काम करता है, जिसका कारण हजारों ₹ चढ़ावा उस दौरान मिलना समझा जाता है। नवरात्रि उत्सव के महाष्टमी के पावन अवसर पर अधिकतर लोग अथवा श्रद्धालु प्रतिमा खंडित होना अशुभ संकेत मान रहे हैं। गत माह तक DC सिरमौर की अध्यक्षता वाले रेणुकाजी विकास बोर्ड के CEO रहे दीपराम शर्मा ने कहा कि, प्रदेश की नई सरकारी बोर्ड भंग कर चुकी हैं और मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कार्यभार तहसीलदार ददाहू देख रहे हैं। तहसीलदार राजेंद्र ठाकुर के मोबाइल पर बात नहीं हो पाई। बहरहाल मां रेणुकाजी व भगवान परशुराम में श्रद्धा रखने वाले लाखों लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले में रेणुकाजी विकास बोर्ड अथवा जिला प्रशासन की अधिकारिक प्रतिक्रिया आना शेष है। बोर्ड से जुड़े लोग यह जरूर कह रहे हैं कि, बिना प्राण प्रतिष्ठा के यह मूर्ति लगाई गई थी।

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