
पटना। बदलती जीवनशैली में कब्ज एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बनी रहती है तो यह पाचन तंत्र की गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईजीआईएमएस) के गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने रविवार को ‘हेलो जागरण’ कार्यक्रम में कहा कि पुराने कब्ज के मामलों में क्लोनोस्कोपी और एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक जांचें बेहद जरूरी हैं। इनसे आंतों में सूजन, पॉलिप्स या कोलन कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
डॉ. मंडल ने बताया कि क्लोनोस्कोपी में पतली ट्यूबनुमा यंत्र की मदद से बड़ी आंत (कोलन) के अंदरूनी हिस्से की जांच होती है, जबकि एंडोस्कोपी से भोजन नली, पेट और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से की स्थिति का पता चलता है। इन दोनों प्रक्रियाओं के जरिए कब्ज के वास्तविक कारण को पहचानकर सही उपचार किया जा सकता है।
मरीजों के सवाल और डॉक्टर के जवाब
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लंबे समय से कब्ज: गैस्ट्रोलॉजिस्ट से मिलकर क्लोनोस्कोपी और एंडोस्कोपी कराएं।
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पेट दर्द व भारीपन: शुगर को नियंत्रित रखें, कद्दू, नेनुआ, पत्तागोभी जैसी रेशेदार सब्जियां खाएं।
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गैस की समस्या: तला-भुना भोजन न करें, समय पर भोजन लें और तनाव से बचें।
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थकावट और वजन न बढ़ना: थायरॉइड जांच कराएं।
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फैटी लिवर: ग्रेड-1 और 2 में खानपान व व्यायाम से सुधार संभव, ग्रेड-3 में लिवर बायोप्सी जरूरी।
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मौसमी पेट रोग से बचाव: दही-छाछ, लस्सी और रेशेदार भोजन करें, जरूरत पड़ने पर 5-7 दिन तक गैस की दवा लें।
कब्ज से बचाव के उपाय
डॉ. मंडल ने कहा कि कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त सब्जियों जैसे पालक, गाजर, भिंडी और फूलगोभी का सेवन करें। जंक फूड, पिज्जा, बर्गर और नूडल्स जैसे तैलीय-मैदे वाले फास्ट फूड से दूरी बनाए रखें। नियमित योग-प्राणायाम और हल्की शारीरिक गतिविधियां पाचन को सक्रिय रखती हैं। समय पर और संतुलित मात्रा में भोजन करें तथा ओवरईटिंग से बचें।



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