पटना हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर
पटना हाईकोर्ट का आदेश: बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर समिति में पारदर्शिता और स्वच्छता अनिवार्य

पटना हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर समिति में लानी होगी पारदर्शिता, स्वच्छता और जवाबदेही
पटना – पटना हाईकोर्ट ने दरभंगा जिले के ऐतिहासिक श्री बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने मंदिर समिति की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वच्छता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव रॉय की एकलपीठ द्वारा अवमानना याचिका संख्या 365/2025 की सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिकाकर्ता संतोष कुमार झा उर्फ संतोष कुमार की ओर से अधिवक्ता पंकज कुमार झा ने मंदिर प्रबंधन में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कई ठोस सुझाव भी प्रस्तुत किए, जिन्हें अदालत ने स्वीकार कर लिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए प्रमुख सुझाव:
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मंदिर में स्थायी रूप से दानपेटियां लगाई जाएं और उन्हें केवल पदाधिकारियों की उपस्थिति में ही खोला जाए।
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मंदिर के बैंक खाते की जानकारी और त्रैमासिक बैंक स्टेटमेंट नियमित रूप से धार्मिक न्यास बोर्ड को भेजी जाए।
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सभी बैठकों की कार्यवाही एक पृष्ठांकित रजिस्टर में दर्ज की जाए।
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मंदिर परिसर की साफ-सफाई और हरियाली सुनिश्चित की जाए।
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उपलब्ध स्थान पर पौधारोपण हो और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंचें लगाई जाएं।
अदालत के निर्देश:
अदालत ने उपरोक्त सभी बिंदुओं को अनिवार्य शर्तों के रूप में स्वीकार करते हुए कहा कि भविष्य में जब भी किसी मंदिर समिति का गठन किया जाए, तो इन शर्तों को ज़रूर शामिल किया जाए। कोर्ट ने बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड को आदेश दिया कि वह वर्तमान बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर समिति को संशोधित आदेश जारी करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बिहार के मंदिरों को दक्षिण भारत के मंदिरों की तरह स्वच्छ और व्यवस्थित बनाया जाना चाहिए। दानापुर स्थित बिहार रेजीमेंटल सेंटर मंदिर को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करते हुए न्यायालय ने कहा कि बाबा कुशेश्वरनाथ मंदिर को भी उसी मॉडल पर विकसित किया जाना चाहिए।
समिति का गठन और अगली कार्रवाई:
धार्मिक न्यास बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष ने 12 जून 2025 को पदभार ग्रहण करने के बाद 25 जून को पहली बैठक में मंदिर के लिए पांच साल की अवधि के लिए एक स्थायी समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता दरभंगा के अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी गई है।
अब अदालत ने यह निर्देश भी दिया है कि अगली सुनवाई 8 अगस्त 2025 को होगी, जिसमें बोर्ड को सभी निर्देशों के अनुपालन की जानकारी हलफनामे के रूप में पेश करनी होगी। साथ ही, यह आदेश मंदिर समिति के अध्यक्ष को भी सौंपा जाए ताकि वे कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें।



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