वोटर लिस्ट से तेजस्वी का नाम गायब, हड़बड़ी में जारी हुआ नया पहचान पत्र
तेजस्वी यादव का नाम वोटर लिस्ट से गायब, फिर जारी हुआ नया EPIC नंबर: चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल

पटना, 3 अगस्त 2025:
बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने यह खुलासा किया कि उनका नाम इस वर्ष की मतदाता सूची से हटा दिया गया है। उन्होंने मीडिया के समक्ष कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश है और इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि जैसे ही उन्होंने इस अनियमितता को सार्वजनिक किया, चुनाव आयोग ने हड़बड़ी में एक नया EPIC नंबर जारी कर उन्हें मतदाता सूची में फिर से जोड़ दिया। लेकिन दोनों EPIC नंबर अलग-अलग हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग ने अपनी गलती छिपाने की कोशिश की है।
क्या है पूरा मामला?
तेजस्वी यादव के मुताबिक, उन्हें हाल ही में जानकारी मिली कि उनकी मतदाता जानकारी अब सूची में मौजूद नहीं है। उन्होंने जब इस बारे में आवाज़ उठाई तो चुनाव आयोग ने बिना कोई स्पष्टीकरण दिए, नया मतदाता पहचान पत्र (EPIC) नंबर जारी कर दिया। इस घटनाक्रम से यह अंदेशा और गहराया कि आयोग ने पूर्ववर्ती विवरणों में फेरबदल किया है।
तेजस्वी ने साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने कहा:
“चुनाव आयोग ने अपनी गलती छुपाने के लिए नई एंट्री की है। लेकिन चोर कितनी भी सतर्कता से चोरी करे, कोई न कोई सबूत छोड़ ही जाता है। EPIC नंबरों में फर्क इसका सबसे बड़ा सबूत है।”
उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया और कहा कि अगर एक विपक्षी नेता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है, तो आम जनता के साथ क्या हो सकता है, यह सोचने का विषय है।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
RJD नेताओं ने इसे ‘राजनीतिक साजिश’ करार देते हुए चुनाव आयोग से तत्काल जवाब माँगा है। वहीं कई विपक्षी दलों ने भी तेजस्वी यादव के समर्थन में बयान दिए और मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है।
चुनाव आयोग की चुप्पी
अब तक चुनाव आयोग की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है। सिर्फ इतना कहा गया है कि “सभी प्रविष्टियाँ नियमों के अनुसार की जा रही हैं।”
अब सवाल यह उठ रहा है:
क्या यह मात्र तकनीकी भूल थी या फिर चुनाव से पहले मतदाता सूची में राजनीतिक हस्तक्षेप का गंभीर उदाहरण?



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