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नगर निगम में सियासी संग्राम: महापौर के खिलाफ कैबिनेट में विद्रोह, पार्षदों में खेमाबंदी तेज

सशक्त स्थायी समिति दो धड़ों में बंटी, बोर्ड बैठक में टकराव तय; महापौर और विधायक समर्थक आमने-सामने

नगर निगम की राजनीति एक बार फिर करवट ले चुकी है। महापौर निर्मला देवी के खिलाफ खुद कैबिनेट के तीन सदस्यों द्वारा विद्रोह के बाद नगर निगम में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य राजीव कुमार पंकू, अभिमन्यु कुमार और उमा पासवान ने महापौर के विरोध में खेमाबंदी कर ली है, जिससे समिति अब दो भागों में बंट चुकी है।

दूसरी ओर, महापौर के पक्ष में केपी पप्पू, सुरभि शिखा, कन्हैया कुमार और अमीत रंजन अब भी डटे हुए हैं। उपमहापौर डॉ. मोनालिसा पहले से ही विरोधी खेमें में हैं।

अब निगम सरकार के लिए किसी भी निर्णय पर आम सहमति बनाना आसान नहीं होगा। सशक्त स्थायी समिति की बैठकें अब हंगामेदार होने की पूरी आशंका है।

वहीं, वार्ड पार्षदों के बीच भी नई खेमाबंदी देखी जा रही है। पहले महापौर समर्थक रहीं वार्ड 42 की पार्षद अर्चना पंडित अब विरोधी खेमें में आ गई हैं, जबकि विरोधी खेमा की नेता चंदा देवी अब महापौर के साथ हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि यह खेमाबंदी आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर की गई है। विधायक विजेंद्र चौधरी के समर्थक पार्षदों का आरोप है कि भाजपा से जुड़े महापौर विकास कार्यों को रोककर कांग्रेस विधायक को नुकसान पहुंचाना चाहती हैं।

नए राजनीतिक समीकरण के चलते अब नगर निगम बोर्ड की बैठकों में टकराव तेज होगा। पार्षद संघ की आवाज पहले जहां दबा दी जाती थी, अब उसे मुखर रूप से सुना जाएगा।

यह स्थिति आने वाले दिनों में न सिर्फ निगम की कार्यशैली को प्रभावित करेगी, बल्कि शहर की विकास योजनाओं को भी राजनीतिक खींचतान का शिकार बना सकती है।

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