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बिहार के सरकारी स्कूलों की हालत बदतर, बच्चों की जान जोखिम में

राजधानी पटना सहित जिले के कई सरकारी स्कूलों की स्थिति भयावह होती जा रही है। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का मौलिक हक है, लेकिन जिन इमारतों में शिक्षा दी जा रही है, वे खुद ही बच्चों और शिक्षकों के लिए खतरा बन चुकी हैं। छत से टपकता पानी, दीवारों में दरारें, गिरता प्लास्टर, जर्जर शौचालय और अतिक्रमण की समस्या – ये अब बिहार के स्कूलों की पहचान बनती जा रही हैं।

हिंदी बालक मध्य विद्यालय: छत नहीं, ईंटों पर चलकर शौच

पटना के बीचों-बीच स्थित हिंदी बालक मध्य विद्यालय, भंवर पोखर में हालात भयावह हैं। छात्राओं का कहना है कि शौचालय इतना गंदा है कि वहां जाने पर उल्टी जैसा लगता है। छतहीन शौचालय में ईंटों पर पाँव रखकर जाना पड़ता है। वहीं, पीने के पानी की व्यवस्था भी बेहद खराब है – नल के पास काई जमी रहती है और बोरिंग का पानी पीने योग्य नहीं। महिला शिक्षिकाएं शौच के लिए पास के बाजार के शौचालय का सहारा लेती हैं। स्कूल के सामने नगर निगम द्वारा कचरा फेंका जाता है, जिससे वर्षा में रास्ता गंदगी से भर जाता है।

मसौढ़ी: सुपहुली स्कूल में गिरा छत का प्लास्टर

प्राथमिक विद्यालय सुपहुली, मसौढ़ी का भवन 2003 से पहले बना था और अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। मंगलवार को छत का प्लास्टर गिरा, गनीमत रही कि कोई हताहत नहीं हुआ। विद्यालय में सिर्फ दो कमरे हैं, जिनमें से एक कार्यालय के रूप में और दूसरा कक्षा के रूप में उपयोग होता है। बरामदे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। भवन निर्माण के लिए 2022 में आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रामपुर, मनेर: विद्यालय परिसर बना तालाब

राजकीय मध्य विद्यालय रामपुर, शेरपुर, मनेर में चारदीवारी के भीतर पानी भर जाता है, जिससे परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है। भवन की छत से प्लास्टर गिर रहा है और दीवारों में दरारें आ गई हैं। शौचालय जलभराव के कारण बंद है, जिससे छात्राओं को भारी परेशानी हो रही है। प्रधान शिक्षक ने दो बार विभाग को पत्र भेजा है, लेकिन अतिक्रमण के चलते काम शुरू नहीं हो सका।

बिक्रम और नौबतपुर: बच्चों की पढ़ाई खतरे में

बिक्रम के मोहनचक गांव का प्राथमिक विद्यालय भी जर्जर हालत में है। दो में से एक कमरे की छत गिर चुकी है और उसे अस्थायी रूप से टीन से ढंका गया है। दूसरी छत किसी भी समय गिर सकती है। टूटी खिड़कियां, दरकी दीवारें और गंदा शौचालय बच्चों और शिक्षकों के लिए खतरा बन चुके हैं। भूमि विवाद के कारण भवन निर्माण अटका हुआ है।

नौबतपुर के मोतीपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय अब भी खपरैल की छत वाले कमरे में चलता है। दीवारें कमजोर हैं और फर्श पूरी तरह टूट चुका है। यहां भी भवन निर्माण की कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

प्रशासन का दावा – जल्द शुरू होगा मरम्मत कार्य

जिला शिक्षा पदाधिकारी साकेत रंजन ने कहा कि जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों से जर्जर स्कूलों की सूची मांगी गई है। शिक्षा विभाग ने मरम्मत हेतु राशि जारी कर दी है और जल्द कार्य शुरू होगा।

@ State Incharge Animesh Anand

Indian Crime News

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