
बिहार के कई सरकारी विद्यालयों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। भवन जर्जर हैं, मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा दी जा रही है। पालीगंज, अथमलगोला और मसौढ़ी क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों की तस्वीर बेहद दयनीय है।
मसौढ़ी प्रखंड का उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुलाबबाग केवल दो जर्जर कमरों में संचालित हो रहा है। बरसात में छत से गिरते प्लास्टर के डर से बच्चों और शिक्षकों में भय का माहौल है। चार महिला शिक्षिकाओं के भरोसे 145 बच्चों की पढ़ाई चल रही है। जगह की कमी के कारण बरामदे में भी कक्षाएं लगाई जा रही हैं। विद्यालय में खेल मैदान, सुरक्षित रास्ता और चारदीवारी तक नहीं है।
पालीगंज के वार्ड 18 में राजकीय बुनियादी विद्यालय की स्थिति भी बेहद खराब है। केवल तीन कमरों में दो विद्यालयों का संचालन हो रहा है। जर्जर कमरों की वजह से बच्चे बरामदे में टेबल लगाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। चारदीवारी के अभाव में मवेशी स्कूल परिसर में बेरोकटोक घुस आते हैं।
अथमलगोला प्रखंड के चंदा गांव में स्थित प्राथमिक एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय की हालत और भी बदतर है। बरसात में स्कूल जलमग्न हो जाता है और भवन इस कदर जर्जर है कि कभी भी हादसा हो सकता है। पीने का पानी, शौचालय, बेंच-डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। यहां कुल 370 छात्रों का नामांकन है, लेकिन सिर्फ एक क्लासरूम है।
लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बारिश के मौसम में दीवारों से पानी रिसता है और कक्षाओं में पानी भर जाता है। शिक्षकों और बच्चों को कभी बरामदे में पढ़ना पड़ता है तो कभी छुट्टी करनी पड़ती है।
स्थानीय अभिभावकों व शिक्षकों ने सरकार और विभागीय अधिकारियों से अपील की है कि इन विद्यालयों का शीघ्र जीर्णोद्धार कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में शिक्षा मिल सके।



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