
भोजपुर, बिहार।
चरपोखरी प्रखंड के पसौर गांव में इस समय हजारों किसान गहरे संकट से जूझ रहे हैं। धान की रोपनी के बाद खेतों में पानी की भारी कमी से फसलें सूखने लगी हैं, और किसान निराशा की कगार पर पहुंच चुके हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई किसानों ने आत्महत्या की चेतावनी तक दे दी है।
सिंचाई का एकमात्र सहारा भी जवाब दे गया
पसौर के किसान वर्षों से काली-बल्ली करहा नहर पर निर्भर रहे हैं, जो गांव के पूर्वी छोर से होकर गुजरती है। लेकिन अब यह नहर कई जगह से टूटी हुई है और बीते कई सालों से इसकी उड़ाही तक नहीं कराई गई। किसान बताते हैं कि पानी छोड़े जाने के बावजूद वह खेतों तक नहीं पहुंचता, बल्कि नहर में ही व्यर्थ बह जाता है।
कागजों पर सफाई, जमीन पर सिर्फ घोटाला!
किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा नहर की सफाई के नाम पर लाखों रुपये की निकासी हो चुकी है, लेकिन धरातल पर सिर्फ लीपापोती की गई है।
मनोज मिश्रा, हदरी यादव, अनिल सिंह और अमरेंद्र सिंह जैसे किसानों ने बताया कि खेतों में पानी की कमी से धान की फसलें पीली पड़ चुकी हैं। अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया, तो पूरे गांव की फसल बर्बाद हो जाएगी।
“किसान की ज़िंदगी दांव पर है” – दीपू साह
किसान दीपू साह ने कहा, “हमारा जीवन खेती पर निर्भर है। पानी नहीं मिला तो फसल नहीं होगी, और फसल नहीं हुई तो घर नहीं चलेगा। अब हम बर्बादी की कगार पर हैं। अगर प्रशासन ने सुनवाई नहीं की तो हम आत्महत्या को मजबूर हो जाएंगे।”
प्रशासन मौन, अधिकारी नदारद
इस गंभीर स्थिति को लेकर जब लघु जल संसाधन विभाग, आरा के कार्यपालक अभियंता से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। प्रशासन की चुप्पी किसानों की नाराजगी को और भड़का रही है।



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