
बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में करीब चार करोड़ 17 लाख निबंधित जमीन दस्तावेजों को तीन चरणों में डिजिटाइज करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य भूमि विवादों को कम करना और अभिलेखों को आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है।
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निबंधन विभाग के अनुसार, अप्रैल 2025 से पांच एजेंसियां इस कार्य में लगी हुई हैं और इस माह के अंत तक लगभग 50 लाख से अधिक दस्तावेज डिजिटल रूप में ऑनलाइन अपलोड कर दिए जाएंगे। इस पहल के तहत नागरिक अब घर बैठे जमीन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और आवश्यक दस्तावेजों को डाउनलोड भी कर सकेंगे।
डिजिटाइजेशन के तीन चरणों की रूपरेखा इस प्रकार है:
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पहला चरण: हाल के वर्षों के दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन (प्रक्रिया प्रारंभ)
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दूसरा चरण: 1948 से 1990 के बीच के लगभग 2.23 करोड़ दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन।
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तीसरा चरण: 1908 से 1947 के बीच के 1.44 करोड़ दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन।
निबंधन विभाग के अनुसार, 1796 से अबतक के दस्तावेज उनके पास कागजी स्वरूप में मौजूद हैं, जिनमें से 99% से अधिक दस्तावेज जमीन-जायदाद से संबंधित हैं। समय पर दस्तावेज न मिलने के कारण भूमि विवादों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। डिजिटाइजेशन से ये दस्तावेज न केवल सुरक्षित होंगे, बल्कि सुलभ और पारदर्शी भी बनेंगे।
इससे न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि भूमि विवादों में कमी, अभिलेखों की हेरा-फेरी पर रोक और भू-माफियाओं पर नियंत्रण भी संभव हो सकेगा।



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