तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट रिवीजन पर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट रिवीजन पर उठाए सवाल, कहा – दलित और यादव बहुल इलाकों से हटाए जा रहे वोटर
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पटना:
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के रिवीजन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि गहन परीक्षण के नाम पर दलित, वंचित और खासकर यादव बहुल इलाकों में वोटरों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास 1, पोलो रोड पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि आयोग ने हाल ही में जानकारी दी कि करीब 35 लाख वोटरों के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं, जिनमें से कुछ की मृत्यु हो चुकी है, कुछ बिहार से बाहर चले गए हैं और कुछ के नाम डुप्लीकेट हैं। लेकिन तेजस्वी का दावा है कि इस प्रक्रिया में भाजपा के इशारे पर विशेष वर्गों के नाम टारगेट किए जा रहे हैं, जिससे आरजेडी और महागठबंधन को चुनाव में नुकसान हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2020 के चुनाव में 35 सीटें ऐसी थीं, जहां हार-जीत का अंतर 3,000 वोट से कम था। ऐसे में एक बूथ से अगर 10 नाम भी हटते हैं तो एक विधानसभा क्षेत्र से करीब 3,200 वोट प्रभावित हो सकते हैं, जिससे चुनाव परिणाम पर व्यापक असर पड़ेगा।
तेजस्वी ने जातीय गणना के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि यादव बिहार की सबसे बड़ी जाति है, जिसकी आबादी 14.2% है और पटना, समस्तीपुर, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में इनकी अच्छी-खासी उपस्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नाम काटे जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग से इस विषय पर स्पष्टीकरण और पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो वह जल्द ही ठोस निर्णय लेंगे।
पृष्ठभूमि:
चुनाव आयोग द्वारा चल रहे मतदाता सूची संशोधन कार्यक्रम के तहत 25 जुलाई तक नामों की समीक्षा की जा रही है। आयोग का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन आरजेडी इसे साजिश बता रही है।



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