बिहार में सुपारी किलर पर सख्त कार्रवाई: STF की नई ‘निगरानी सेल’ शुरू

पटना, 17 जुलाई 2025 — राज्य में सुपारी देकर कराई जाने वाली हत्याओं में वृद्धि के मद्देनजर बिहार पुलिस मुख्यालय ने नई पहल के तहत एक ‘सुपारी किलर निगरानी सेल’ की स्थापना की है। यह सेल विशेष कार्य बल (STF) के अधीन काम करेगी, जिसका मकसद है इन हत्याओं में लिप्त व्यक्तियों की पहचान, संतुलित निगरानी और डाटा संग्रह। राज्य के डाकु गोंडूपरिणाम ज्ञात मामले—विशेषकर हालिया गोपाल खेमका हत्याकांड—ने इस कदम को और अधिक जरूरी बना दिया है। ![]()
मुख्य बिंदु:
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सुपारी किलर डाटाबैंक
STF की नई सेल शूटर और सुपारी किलरों की तस्वीरों, हुलिया और कोर्टीन आज्ञाओं का डाटाबैंक बनाएगी, जिससे संभावित अपराधियों पर तेज़ी से नजर रखी जा सकेगी। -
जेल और रिहा अपराधियों की निगरानी
जेल में बंद को भी लगातार मॉनिटर किया जाएगा और रिहा होने वाले अपराधियों की गतिविधियों पर थाना स्तर पर सतर्क निगरानी के निर्देश जारी किए गए हैं। -
युवा सुपारी किलरों की बढ़ती भागीदारी
एसटीएफ के एडीजी कुंदन कृष्णन ने बताया कि अधिकांश सुपारी किलर युवा हैं, जिन्हें कम राशि देकर हत्या कराई जा रही है। हाल में पटना में तीन प्रमुख हत्या मामलों में इनकी संलिप्तता सामने आई। -
अपराध: पुलिस ही जिम्मेदार नहीं
किशोर और नाबालिग अपराधियों की बढ़ती संख्या पर कुंदन कृष्णन ने समाज और अभिभावकों की जिम्मेदारी की भी ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जैसे वाहन चलाने पर अभिभावकों को जवाबदेह ठहराया जाता है, वैसे ही आर्म्स एक्ट उल्लंघन में भी अभिभावक दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। -
फर्जी लाइसेंस और हथियार तस्करी का नेटवर्क
पिछले छह महीनों में यूपी, बंगाल और झारखंड से जुड़े हथियार तस्करों का भंडाफोड़ किया गया। भोजपुर के जयपुकार गैंग जैसे गिरोहों ने फर्जी लाइसेंस बनाकर वैध दुकान से हथियार अपराधियों को सप्लाई किए। -
गोपाल खेमका हत्याकांड की जांच में संतुष्टि
एसटीएफ को उमेश राय (शूटर) और अशोक साव (आदेशदाता) की गिरफ्तारी, रेकनॉइसेंस वीडियोज़ व अन्य साक्ष्य मिले हैं। हालांकि, बांकीपुर क्लब में मीडिया कैमरों की कमी से साक्ष्यों की गुणवत्ता प्रभावित हुई — इस पर भी एसटीएफ ने चिंता जताई।
पूर्व में STF के अंतर्गत मौजूद विशेष सेल:
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बैंक एवं ज्वेलरी लूट सेल
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आर्म्स सेल
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नॉरकोटिक्स सेल
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कोढ़ा सेल
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इकोनॉमिक इंटेलिजेंस सेल
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ड्रोन सेल
निष्कर्ष:
बिहार पुलिस की यह नई पहल—शबाब पर निगरानी रखने, डाटाबैंक विकसित करने और समाज में युवाओं की ऊंछाई पर संयम लाने के प्रयास—राज्य में सुपारी आधारित हत्याओं को नियंत्रित करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है। लेकिन इस लड़ाई में केवल पुलिस नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।



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