
पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने रविवार को कहा कि अग्निकांडों में झुलसे मरीजों के लिए समुचित चिकित्सा के साथ-साथ सामाजिक सहयोग और जन जागरूकता भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार बर्न यूनिट्स को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत अब राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में स्किन बैंक की स्थापना की जाएगी, जहां प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अंतर्गत बर्न यूनिट संचालित हो रही है।![]()
स्वास्थ्य मंत्री नेशनल एकेडमी ऑफ बर्न्स इंडिया (NABI) के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्किन बैंक की स्थापना से गंभीर रूप से झुलसे रोगियों को बाहर नहीं भेजना पड़ेगा। राज्य में वर्तमान में 20 बर्न यूनिट कार्यरत हैं, जबकि एम्स पटना में बर्न यूनिट निर्माणाधीन है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय स्वास्थ्य मेला ‘जन आरोग्य पर्व’ में हजारों लोगों ने जांच, निःशुल्क दवाओं और विशेषज्ञ परामर्श का लाभ उठाया। उन्होंने कहा कि संगीत चिकित्सा को नए अस्पतालों में शामिल किया जा रहा है जिससे मरीजों का मानसिक तनाव कम होगा और इलाज अधिक प्रभावी बनेगा।
एम्स पटना में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के 200 से अधिक डॉक्टर, रेजिडेंट, नर्स, फिजियोथेरेपिस्ट और डाइटीशियन शामिल हुए। डॉ. वीणा सिंह, डॉ. प्रणव, और दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पुणे समेत कई राज्यों से आए विशेषज्ञों ने जलने की रोकथाम, प्राथमिक उपचार, स्किन ग्राफ्टिंग और सामाजिक पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
स्किन बैंक की आवश्यकता पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि इससे संक्रमण और दर्द में कमी आएगी, और 60 से 90 प्रतिशत झुलसे रोगियों की जान बचाई जा सकेगी। फिलहाल स्किन ग्राफ्टिंग के लिए बिहार से मरीजों को अन्य राज्यों में रेफर करना पड़ता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने इसे ‘स्वस्थ बिहार, समृद्ध बिहार’ की दिशा में एक ठोस कदम बताया।



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