
रिपोर्टर चन्दन कुमार झा समस्तीपुर बिहार
प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं होता जिनके पँख नहीं होते बस हौसले होते है हौसले ही उनके पँख होते है।
जब जज्बा हो कुछ कर गुजरने कि तो मंजिल दूर होते हुए भी पास नजर आने लगती है और उड़ान पंखो से नहीं हौसलों से भरी जाती है। ऐसी ही कहानी है समस्तीपुर जिला के सुदूरवर्ती रोसेरा से सटे ढरहा गाँव के रहने वाले राजीव कुमार की। जो कि विपरीत परिस्थितियों मे भी अपने सौख को जिन्दा रख उसे एक नया आयाम देने मे लगातार जुटा हुआ है। गुमनामी के अँधेरे मे कैद राजीव कुमार पोखर के समीप प्रकृतिक छटा मे अपनी लेखनी काला मे निखार लाने वाला राजीव कुमार करीब 10 गाने लिख चुका है जिसमे दो गाने रिलीज भी हो चुका है। गुमनामी के अँधेरे मे कैद राजीव कुमार ने इस होली के अवसर पर ऐसे दो गाने लिखें है जो हर किसी के जुबां पर रहता है। लोगों को उम्मीद है कि एक न एक दिन राजीव कुमार का मेहनत रंग लाएगा और उसे छाँव का प्लेटफॉर्ममिलेगा भले ही लक्ष्मी ने इस ढरहा के लाल पर अपनी रहमत नहीं बरसाई है लेकिन सरस्वती का ऐसा भरपूर आशीर्वाद है जो किसी को भी अचरज मे डाल दे।



Subscribe to my channel