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Madhya Pradesh News भगवान नाम स्मरण ही जीवन मे क्रांतिकारी परिवर्तन लाता है, सारे वेदो का सार ही भगवान नाम स्मरण है-स्वामीजी।

रिपोर्टर दीपक तिवारी देवास मध्य प्रदेश

नेमावर  मन, वाणी व शरीर से कभी पाप मत करो। जीवन मे भगवान नाम स्मरण ही क्रांतिकारी परिवर्तन लाता है। सारे वेदो का सार ही भगवान नाम स्मरण है। श्रीबालमुकुन्द सेवाश्रम(अन्नक्षेत्र एवं संस्कृत शिक्षा) नेमावर मे आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस व्यासपीठ से गया पीठाधिश्वर स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्यजी महाराज ने भगवान नाम स्मरण का परिणाम बताया। कथा का प्रारंभ आचार्यश्री ने नर्मदाअष्टक पाठ से किया। उल्लेखनीय है कि उसी दौरान कावड मे मॉ नर्मदा का जल लिए अन्यत्र स्थल की 20 से अधिक महिला व बालिकाए पांडाल मे आई। नर्मदाअष्टक पाठ तक पूरे भाव से नृृत्य करती रही। जैसे ही पाठ पूरा हुआ, नर्मदा स्वरूप मे आई मातृ- शक्ति श्रीमद्भागवत महाग्रंथ को प्रणाम करके चली गई। संत जब किसी के दरवाजे पर जाते है तो उसके अनेक पीढी के पाप नष्ट हो जाते है। अजामिल प्रसंग पर समझाते हुए कहा कि संतो की कृपा से नारायण नाम स्मरण ही पर्याप्त है। वर्तमान परिवेष पर स्वच्छ करने के लिए समझाया कि विकार नैत्रो से ही प्रवेश करता है। इसलिए दृष्टी हमेशा अच्छी होनी चाहिए। इस संसार मे मानव समरसता का पाठ श्रीरामानुज स्वामीजी महाराज ने ही सिखाया। युद्ध नीति के तहत राजा बलि व वामन अवतार के प्रसंग को समझाया। आचार्यश्री ने बताया कि बलिराजा को जब उनके गुरू शुक्रचार्य ने बताया कि ब्रहाण के रूप मे स्वयं नारायण तुमसे मांगने आए है। इनके संकल्प का पूरा करने पर तुम्हे नर्क मिलेगा। जिस पर राजा बलि ने अपने गुरू शुक्राचार्यजी से कहा कि सारे संसार को देने वाला आज मेरे दरवाजे आया है यह मेरा परम सोभाग्य है।

ऐसा करने पर यदि मुझे हर बार नर्क मिले तो भी मे सहर्ष स्वीकार करूंगा। भगवान ने राजा बलि के परिवार को शरणागति दी। वेकुण्ठाधिपति भगवान नारायण अपने भक्त के मान को बढाने के लिए बाद मे उसके द्वारपाल बने। कथा के प्रारंभ मे नागोरिया पीठाधिश्वर विष्णुप्रपन्नाचार्यजी महाराज के सानिध्य मे गोपालदास सिंगी, नटवर बियाणी, शैलेष होलानी, सत्यनारायण अग्रवाल, रंगेश बियाणी, राजेश होलानी, जगदीश राठी, गोपालदास सोमानी, विष्णुकुमार धूत, श्याम शर्मा, रमेश मानधना, गोबिन्द गर्ग, सोहनलाल बियाणी, रवि सोमानी, शुभम मानधन्या, सुनील भूतडा ने व्यास पीठा का पूजन कर संतो से आशीर्वाद लिया। कथा के दौरान अदिया सोमानी बाल कृष्ण बनी। नंदबाबा राजगोपाल सोमानी, वासूदेव राम सिंगी, वामन देवता आदर्श शर्मा, राजा बली आदि मानधना बने। समिति के संजय गुप्ता , सुशील पसारी, गिरधर राठी सहित कार्यकर्ताओ द्वारा प्रतिदिन दास भाव से कार्य किया जा रहा है। प्रथम सत्र मे नागोरिया पीठाधिष्वर महाराज के पावन सानिध्य मे मदनलाल कन्हैयालाल राठी परिवार की और से मंत्रोचार के साथ संतो ने ठाकुरजी का 81 कलशो से महाभिषेक किया।
चित्र नेमावर 01 मे-कथा श्रवण करती महिलाए।
चित्र नेमावर 02 मे-कथा सुनाते आचार्यश्री

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