Madhya Pradesh News पेसा कानून जनजातीय समाज के लिए संजीवनी है,शांति एवं विवाद निवारण समितियों को पुलिस थाना पेटलावद पर दिया गया प्रशिक्षण।
स्थानीय पुलिस थाना पेटलावद में PESA कानून के अंतर्गत गठित ग्राम सभा शांति एवं विवाद निवारण समितियों का प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ।

रिपोर्टर संतोष बसोड झाबुआ मध्यप्रदेश
जिसमें PESA ब्लाक समन्वयक अधिकारी कैलाश निनामा ने शांति एवं विवाद निवारण समितियों को समझाते हुए बताया की हमारे क्षेत्र में सरकार ने जनजाति समाज को सशक्त बनाने के लिए PESA कानून लागू किया गया है, उसके बाद भी हम लोग थानों पर क्यों आते हैं? हम लोग कोर्ट कचहरी के चक्कर क्यों लगाते हैं? जबकि PESA कानून ये कहता है कि पारंपरिक रूप से हमारी ग्राम सभा ही पुलिस थाना हैं और हमारी ग्राम सभा ही न्यायालय हैं तो फिर हम लोग छोटे छोटे मामले लेकर थानों पर क्यों आते हैं हम लोगों को ऐसे मामले जो गंभीर अपराध की श्रेणी में न आते हो ऐसे मामलों को हमें ग्राम सभा के माध्यम से गांव में ही निपटा लेना चाहिए।हम लोग छोटे छोटे मामलों को लेकर थाने पर आते हैं और एफआईआर होने के बाद वो मामला कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाता है और वही मामला कितना लम्बा समय ले लेता है उसकी कोई समय सीमा नहीं होती है। जबकि हम लोगों को मामलों में एफआईआर होने के बाद कायमी होने के बाद जेल जाना पड़ता है और जमानत पर आने के बाद कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अंत में हमें ग्राम सभा के माध्यम से समझौता करना पड़ता है हम लोग घूम फिरकर लास्ट में ग्राम सभा में जाते हैं तो क्यों न हम पहले ही इन मामलों को लेकर ग्राम में निपटारा कर लें। इसलिए हमारे जनजाति समाज को आर्थिक रूप से भी नुकसान होता है। साथ ही समय भी बर्बाद होता है। इसलिए हमें ऐसे मामलों को शांति एवं विवाद निवारण समितियों के माध्यम से ग्राम में ही सर्वसहमति से निपटारा करना चाहिए। PESA कानून हमारे समाज के लिए संजीवनी है, पेसा कानून कमजोर नहीं, कमजोर आप लोग है जो इसे सही से समझ नहीं पा रहे हो। इसके साथ ही कैलाश निनामा ने PESA के सभी प्रावधानों को विस्तार से बताया ताकि PESA कानून को लेकर लोगों में किसी प्रकार से कोई अभाव न रहें। इस अवसर पर पेटलावद थाना प्रभारी राजू बघेल एवं अन्य पुलिस कर्मी साथ ही पेसा मोबलाइजर दुर्गा मेड़ा, मोनिका मावी,मोहन गरवाल, दिनेश भाभर, धीरेंद्र डामर,गौरसिंह राणा, शिवराम निनामा एवं थाने के अंतर्गत आने वाले गांवों की शांति समितियों के सभी सदस्य उपस्थित रहे।


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