Madhya Pradesh News ग्वालियर के स्मार्ट सिटी बनने के बाद भी शहरों मे नजर आ रहीं है गंदगी;
सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के लिए बनाए गये नियमों का नहीं हो रहा है

रिपोर्टर उषा रजक ग्वालियर मध्य प्रदेश
सरकार द्वारा चलाए गये स्वच्छ भारत अभियान और नियमों का ज्यादातर जगहों पर पालन होता नजर नहीं आ रहा क्युकी सकार ने जनता से भी अपील और निवेदन किया था कि सूखा- गीला कचरा अलग- अलग डस्टबीन मे ही फेंके और आपके घरो के बाहर आई हुई नगर- निगम कचरा गाड़ी मे ही कचरा फेंके सडको के किनारे, नालों मे कचरा ना डाले , लेकिन सोचने की बात य़े है कि सरकार की इस अपील और निवेदन कों कितने लोगो नें माना है क्युकि एक रिपोर्ट के अनुसार आज़ भी घर ,मोहल्ले के बाहर गंदगी ,कचरा देखने को मिलता है . जी हाँ मै बात कर रही हू ऐसी ही एक जगह की जहा आज़ भी नालों मे और गली-मोहल्ले मे गंदे पानी , कचरे का अंबार देखने को मिल है थाटीपुर मटके वाली गली गोपालपुरा ग्वालियर, जहा एक और सरकारी शौचालय बना है जो काफी पुराना है जो अब उसी शौचालय के सामने एक नाला निकला हुआ है हालांकि नगर-निगम के द्वारा J.C.B से उस नाले की हर 2-4 दिन बाद सफाई भी की जाती है उसमे भरा हुआ कुड़ा – कचरा ,गोबर , निकालकर पुन: साफ किया जाता है और स्थानीय लोगों को नगर निगम सफाई कर्मचारियो द्वारा कचरा,गोबर ना फेंकने की समझाइश भी दी जाती है
लेकिन नगर- निगम की इस बात को वहा सथानिया लोग कितनी गम्भीरता से लेते यह तो साफ नजर आ रहा है कि निगम सफाई कर्मचारियो के सफाई कर देने के बाद स्थानीय लोग दूसरे दिन से ही वहा दोबारा कचरा फैकना शुरू कर देते है जिससे नाले की वहीं स्थिति बन जाती है और फ़िर स्थानिय और भी लोगों को आवागमन मे परेशानी उठाना पडती है अब सवाल य़े है की इसमे गलती किसकी है ?
इन सभी के लिए जिम्मेदार कौन है ? स्थानीय लोगो की ? या सरकार की क्युकि अगर सरकार इस स्वच्छ भारत अभियान के लिए कढे नियम और कढे कानून बनाये तो शायद कुछ ठीक हो सकता और कागज पर तो स्मार्ट सिटी बन चुका ग्वालियर हकीकत मे भी स्मार्ट सिटी बनकर नम्बर. 1 पर आ जाए
ग्वालियर से मैे उषा रजक ग्वालियर स्मार्ट सिटी पे इक रिपोर्टें



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