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Rajasthan News : उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: जिला उपभोक्ता आयोग ने नगर पालिका पिण्डवाड़ा को अतिरिक्त राशि लौटाने के दिए आदेश

रिपोर्टर राकेश वैष्णव सिरोही राजस्थान

पिण्डवाड़ा/सिरोही। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सिरोही ने नगर पालिका मंडल पिण्डवाड़ा के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वर्षों से अतिरिक्त राशि की मांग का सामना कर रहे भूखंडधारियों को बड़ी राहत प्रदान की है। आयोग ने नगर पालिका द्वारा सुखाड़िया आवासीय योजना के भूखंडधारियों से की गई अतिरिक्त राशि की मांग को अनुचित एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की भावना के विपरीत मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है। साथ ही नगर पालिका को आदेश दिया है कि संबंधित भूखंडधारियों से मांगी गई अतिरिक्त राशि का भुगतान आदेश दिनांक 18 मार्च 2026 से 45 दिनों के भीतर वापस किया जाए। आयोग ने मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक प्रताड़ना के लिए परिवादियों को 5 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के भी निर्देश दिए हैं। प्रकरण के अनुसार नगर पालिका मंडल पिण्डवाड़ा ने वर्ष 1989 में एफ.सी.आई. योजना के अंतर्गत सुखाड़िया आवासीय कॉलोनी विकसित की थी। उस समय शासन के निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के तहत पात्र व्यक्तियों को लॉटरी प्रणाली से भूखंड आवंटित किए गए। आवंटियों से निर्धारित मूल्य प्राप्त कर उन्हें भूखंडों का कब्जा भी सौंप दिया गया और उन्होंने अपने मकानों का निर्माण कर वर्षों से निवास करना शुरू कर दिया।


परंतु कई वर्षों बाद वर्ष 1997 में नगर पालिका के नए बोर्ड के गठन के पश्चात सुखाड़िया कॉलोनी का नाम बदलकर श्रीराम आवासीय योजना कर दिया गया। इसके साथ ही पहले से आवंटित भूखंडों पर अतिरिक्त राशि जमा कराने के लिए भूखंडधारियों पर दबाव बनाया जाने लगा। जबकि मूल योजना में ऐसी किसी अतिरिक्त राशि का कोई प्रावधान नहीं था। नगर पालिका की इस कार्रवाई से अनेक भूखंडधारियों में असंतोष फैल गया और उन्हें मानसिक एवं आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा। इसी मामले को लेकर पिण्डवाड़ा निवासी कन्हैयालाल कलाल एवं बाबूलाल जैन ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सिरोही में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों एवं दस्तावेजों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि नगर पालिका मंडल पिण्डवाड़ा द्वारा पहले पूर्ण मूल्य लेकर भूखंडों का आवंटन करने के बाद वर्षों पश्चात अतिरिक्त राशि की मांग करना न्यायोचित नहीं है तथा यह उपभोक्ताओं के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग के पीठासीन अधिकारी एवं सदस्यों ने अपने निर्णय में कहा कि नगर पालिका की कार्रवाई के कारण भूखंडधारियों को मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक कष्ट उठाना पड़ा। इसलिए नगर पालिका को निर्देशित किया गया कि अतिरिक्त राशि की मांग तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए तथा जिन उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि ली गई है, उन्हें आदेश दिनांक 18 मार्च 2026 से 45 दिनों के भीतर राशि वापस लौटाई जाए। इसके अतिरिक्त परिवादियों को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए 5,000 रुपये क्षतिपूर्ति देने के भी आदेश दिए गए।
जानकारी के अनुसार आयोग का आदेश पारित होने के बावजूद अब तक संबंधित उपभोक्ताओं को राशि वापस नहीं मिली है। साथ ही यह भी बताया गया कि नगर पालिका प्रशासन ने आयोग के आदेश के विरुद्ध किसी उच्च न्यायालय अथवा सक्षम मंच से कोई स्थगन आदेश (स्टे) भी प्राप्त नहीं किया है। ऐसे में उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि आयोग के आदेश की शीघ्र पालना कर उन्हें उनका अधिकार दिलाया जाएगा। यह निर्णय भविष्य में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा तथा सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

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