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Uttar Pradesh News गड्ढों में विकास और टूटी सड़क की विरासत बनी सोनभद्र की पहचान

अनपरा-शक्तिनगर-रेणुकूट मार्ग पर ‘अटकन, झटकन और लटकन’ का सफर, हर मोड़ पर हादसों का खतरा

रिपोर्टर चन्द्रिका प्रसाद उत्तर प्रदेश

बरसात में तालाब बन जाते हैं गड्ढे, जिम्मेदार मौन और जनता परेशान शक्तिनगर, सोनभद्र। यदि ऊर्जांचल में विकास और विरासत का वास्तविक स्वरूप देखना हो तो शक्तिनगर से अनपरा तक मुख्य मार्ग का एक चक्कर लगा आइए। सड़क पर सफर करते समय मिलने वाला “अटकन, झटकन और लटकन” का अनुभव यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर इसी विकास की रफ्तार को देखने के लिए जनता लोकतंत्र में मतदान करती है या नहीं। दुद्धीचुआ खदान मोड़ से लेकर शक्तिनगर, खड़िया, कोहरौल, बीना, ककरी, रेनूसागर मोड़, अनपरा मोड़, औड़ीकाशी मोड़ और रेणुकूट तक मुख्य मार्ग की स्थिति बदहाल है। सड़क जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और कई स्थानों पर डामर पूरी तरह उखड़ चुका है। बरसात के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क छोटे-छोटे तालाबों का रूप ले लेती है, जिससे दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

सबसे चिंताजनक स्थिति शक्तिनगर थाना परिसर से महज कुछ मीटर की दूरी पर दिखाई देती है, जहां सड़क पर बने गहरे गड्ढे किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी मुख्य चौराहे पर टूटी सड़क दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण देती नजर आती है। राजकिशन बस्ती के समीप सड़क पर लगभग छह फीट चौड़ा और दो फीट गहरा गड्ढा बना हुआ है, जो किसी भी राहगीर या वाहन चालक के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। खड़िया बाजार का हाल भी किसी से छिपा नहीं है। खड़िया पेट्रोल पंप के आसपास लगभग दो किलोमीटर तक सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। भारी वाहनों के लगातार दबाव और समय पर मरम्मत न होने के कारण सड़क की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। कोयला और राखड़ परिवहन करने वाले भारी वाहनों के कारण सड़क पर धूल, जाम और दुर्घटनाओं की समस्या अलग से बनी रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी महात्मा गांधी के तीन बंदरों की तरह आंख, कान और मुंह बंद किए हुए हैं।

जनसरोकार से जुड़े इस गंभीर विषय पर न तो प्रशासन सक्रिय दिखाई देता है और न ही जनप्रतिनिधि। जनता के वोटों से चुनकर सत्ता तक पहुंचने वाले प्रतिनिधि भी इस समस्या से मुंह मोड़े हुए हैं, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विडंबना यह है कि तमाम अधिकारी और जनप्रतिनिधि प्रतिदिन इन्हीं मार्गों से गुजरते हैं, लेकिन वातानुकूलित वाहनों की गद्देदार सीटों पर बैठकर शायद उन्हें सड़क के गड्ढे, धूल और जनता की परेशानी दिखाई नहीं देती। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की यह दुर्दशा केवल विकास कार्यों की पोल नहीं खोलती, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो ऊर्जांचल की जनता सड़क, सुरक्षा और जनहित के मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन छेड़ने को मजबूर होगी। लोगों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला समाधान चाहिए।

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