Madhya Pradesh News ग्राम बरखेड़ा में आयोजित एक दिवसीय अमृतवाणी सत्संग में श्री राम शरण आश्रम के प्रवक्ता श्री इंद्रसिंह नागर भाई जी ने माता-पिता के महत्व पर मार्मिक उद्बोधन दिया।

रिपोर्टर रवि धाकड़।
ग्राम बरखेड़ा में आयोजित एक दिवसीय अमृतवाणी सत्संग में श्री राम शरण आश्रम के प्रवक्ता श्री इंद्रसिंह नागर भाई जी ने माता-पिता के महत्व पर मार्मिक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि “माता-पिता इस धरती के भगवान हैं और उनकी संतान उनके अरमान। माँ के चरणों में अवश्य ही स्वर्ग है, लेकिन पिता स्वर्ग का दरवाजा है।” नागर भाई जी ने वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ये शब्द सुनने में बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन हकीकत में कई माता-पिता वृद्धाश्रमों में हैं, घरों में अपमानित होकर दुखी हैं या बच्चे उनसे दूर विदेशों में रहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह श्री राम, श्री कृष्ण और श्रवण कुमार का देश है, जिन्होंने माता-पिता को सर्वोच्च सम्मान और सेवा दी। अफसोस की बात है कि उन्हें मानने वाले कई लोग यह भूल गए हैं। “भगवान ऐसे लोगों को क्षमा नहीं करते। हर कर्म का हिसाब होता है, लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद और परमात्मा की कृपा बेहिसाब होती है”, उन्होंने कहा।

आयोजकों की प्रेरणादायी पहल सत्संग के आयोजक श्री सोहन भारतीय एवं श्री मोहन भारतीय प्रतिवर्ष अपने पिता की स्मृति में इस कार्यक्रम का आयोजन कर समाज को प्रेरणा देते हैं। जीतेजी इन्होंने अपने पिता की भरपूर सेवा की और माँ को भी भगवान का दर्जा दिया। नागर भाई जी ने कहा, “धन्य हैं सोहन भारतीय जैसे पुत्र।” कार्यक्रम के अंत में सोहन भारतीय ने सभी श्रद्धालुओं, ग्रामवासियों और समाचार पत्र प्रतिनिधियों का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सरपंच, पंचगण सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने माता-पिता की सेवा का संकल्प लिया।उक्त जानकारी राम शरणम के डा सुरेश गुर्जर द्वारा प्रसारित की




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