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Chhattisgarh News अकलतरा क्षेत्र में औद्योगिक विस्तार को लेकर जनसुनवाई: कल्याणपुर सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने रखी अपनी राय

रिपोर्टर मनोज मानिकपुरी कोरबा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) और जिला प्रशासन द्वारा अकलतरा तहसील के अंतर्गत औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और विस्तार को लेकर लगातार प्रशासनिक कवायद की जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत कल्याणपुर, अमरताल, कीरारी, मुड़पार, तागा और खिसोरा सहित आस-पास के लगभग 15 से अधिक गांवों के प्रभावित ग्रामीणों की उपस्थिति में जनसुनवाई (Public Hearing) आयोजित की गई।
​इस जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में प्रस्तावित नए प्रोजेक्ट्स और पर्यावरण पर पड़ने वाले उनके प्रभावों (EIA) को लेकर स्थानीय लोगों की आपत्तियां, सुझाव और सहमति दर्ज करना था।
​इन बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर हुई चर्चा
​प्रशासनिक अधिकारियों और पर्यावरण विशेषज्ञों की मौजूदगी में क्षेत्र के दो बड़े प्रोजेक्ट्स के ड्राफ्ट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) रिपोर्ट पर स्थानीय स्तर पर विचार साझा किए गए:
​मुड़पार में अनाज आधारित एथेनॉल प्लांट: मेसर्स श्री श्याम एथेनॉल एंड स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मुड़पार (अकलतरा) में 195 KLD क्षमता का ग्रेन-बेस्ड डिस्टिलरी (एथेनॉल प्लांट) और 7.0 MW का को-जेन पावर प्लांट प्रस्तावित है। इसका सीधा प्रभाव सीमा से लगे कल्याणपुर और अन्य नजदीकी गांवों पर पड़ेगा।
​अमरताल-कीरारी में फ्लाई ऐश ब्रिक प्लांट व विस्तार: मेसर्स एमवीके इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा अपने मौजूदा 15 मेगावाट बायोमास आधारित बिजली संयंत्र के परिसर में ही पैलेट प्लांट, स्पंज आयरन (DRI किल्न्स), फेरो अलॉयज यूनिट और सालाना 8.6 मिलियन फ्लाई ऐश ईंट निर्माण इकाई के विस्तार को लेकर पर्यावरण स्वीकृति मांगी गई है।
​ग्रामीणों ने उठाए रोजगार और प्रदूषण के मुद्दे
​जनसुनवाई के दौरान कल्याणपुर और आस-पास के ग्रामीणों ने उद्योगों के आने से होने वाले लाभ और नुकसान दोनों पर अपनी खुलकर बात रखी:
​स्थानीय रोजगार की मांग: प्रभावित क्षेत्र के युवाओं और सरपंच-प्रतिनिधियों ने पुरजोर मांग की कि यदि कंपनियों को पर्यावरण क्लीयरेंस दी जाती है, तो कल्याणपुर और नजदीकी गांवों के कुशल व अकुशल स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जाए।
​प्रदूषण नियंत्रण पर जोर: ग्रामीणों ने फ्लाई ऐश (राख) और पानी के स्रोतों के प्रदूषित होने की चिंता जताई। इसके जवाब में अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि पर्यावरण नियमों (CPCB गाइडलाइंस) के तहत कंपनियों को आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों (ESP) और वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट लगाना अनिवार्य होगा।
​प्रशासनिक रिपोर्ट होगी आगे रवाना
​कल्याणपुर सहित अन्य पंचायतों के कार्यालयों में इस परियोजना की हिंदी और अंग्रेजी रिपोर्ट पहले ही निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराई गई थी। जनसुनवाई के दौरान दर्ज किए गए ग्रामीणों के लिखित और मौखिक बयानों, सुझावों तथा वीडियो रिकॉर्डिंग को संकलित कर अंतिम रिपोर्ट केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को पर्यावरण स्वीकृति (EC) के अंतिम फैसले के लिए भेजी जा रही है।

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