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Uttar Pradesh News लम्भुआ में सपा की अंदरूनी लड़ाई आई खुलकर सामने! बाजीगर के धरने से बड़े नेताओं की दूरी ने बढ़ाए सियासी सवाल

रिपोर्टर गौरव सक्सेना जिला संवाददाता फर्रुखाबाद

लम्भुआ, सुलतानपुर।
समाजवादी पार्टी के नेता जितेंद्र वर्मा ‘बाजीगर’ द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन अब सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सपा की अंदरूनी राजनीति और कथित गुटबाजी की बड़ी कहानी बनता नजर आ रहा है। धरने में पार्टी के कई बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर लम्भुआ विधानसभा में सब कुछ ठीक-ठाक है या नहीं।

सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि धरना-प्रदर्शन के प्रचार-प्रसार में लगे पोस्टरों से लेकर कार्यक्रम स्थल तक सपा * जिला सचिव परमात्मा यादव जिला अध्यक्ष रघुवीर यादव की मौजूदगी नहीं दिखाई दी। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष सत्यपाल यादव, पूर्व विधायक संतोष पाण्डेय, पूर्व कोऑपरेटिव अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह बबलू, पूर्व जिलाध्यक्ष पृथ्वीपाल यादव, जिला महासचिव एवं पूर्व नगर पंचायत प्रत्याशी अतेंद्र जायसवाल समेत संगठन के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी कार्यक्रम से दूर रहे।

इतना ही नहीं, लम्भुआ विधानसभा के तीनों ब्लॉक अध्यक्षों, बड़ी संख्या में सेक्टर प्रभारियों, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धरना-प्रदर्शन को पार्टी संगठन का पूर्ण समर्थन प्राप्त था या यह किसी एक खेमे का शक्ति प्रदर्शन बनकर रह गया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि समाजवादी पार्टी में समय-समय पर अलग-अलग शक्ति केंद्र उभरते रहे हैं, लेकिन लम्भुआ में पहली बार मामला इतने खुले रूप में दिखाई दे रहा है। चर्चा यह भी है कि कुछ समय पूर्व एक सामाजिक कार्यक्रम में जितेंद्र वर्मा ‘बाजीगर’ द्वारा शिवपाल यादव को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने संबंधी बयान दिए जाने के बाद पार्टी नेतृत्व नाराज हुआ था। बताया जाता है कि इस बयान को लेकर उन्हें संगठन स्तर पर फटकार भी मिली थी। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

धरना-प्रदर्शन में वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर अब तरह-तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि पार्टी के सभी प्रमुख नेता किसी बड़े आंदोलन से दूरी बनाए रखते हैं तो यह सामान्य राजनीतिक घटना नहीं मानी जाती। इससे संगठन के भीतर चल रही खींचतान और असहमति की चर्चाओं को बल मिलता है।

क्षेत्र में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि जब पोस्टरों में जिलाध्यक्ष की तस्वीर नहीं दिखी और फिर वह स्वयं कार्यक्रम में भी शामिल नहीं हुए, तो क्या यह महज संयोग है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है? यही नहीं, कई कार्यकर्ता यह भी चर्चा कर रहे हैं कि लम्भुआ विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी दो अलग-अलग खेमों में बंटी हुई दिखाई दे रही है।

फिलहाल, धरना-प्रदर्शन से अधिक चर्चा उसमें कौन आया और कौन नहीं आया इस बात की हो रही है। सियासी गलियारों में यह मुद्दा अब बहस का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यदि पार्टी नेतृत्व इस मामले पर कोई स्पष्ट संदेश नहीं देता है तो लम्भुआ की राजनीति में गुटबाजी की चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

सुर्खी
बाजीगर के धरने से दूर रहे सपा के बड़े चेहरे, लम्भुआ में क्या दो खेमों में बंट गई समाजवादी पार्टी
जिलाध्यक्ष रघुवीर यादव समेत कई दिग्गज नेताओं की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय, संगठन में अंदरूनी खींचतान की अटकलें तेज

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