
पटना | जुलाई 26, 2025
बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ विधायक और लालू प्रसाद यादव के करीबी भाई वीरेंद्र ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2010 में, जब राजद के पास सिर्फ 22 विधायक बचे थे, तब उन्हें पार्टी छोड़ने के एवज में 2 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया।
राजद विधायक ने दावा किया कि उस वक्त जीतन राम मांझी के करीबी और ‘हम’ पार्टी के वर्तमान प्रवक्ता दानिश रिजवान उनके पास दो करोड़ रुपये लेकर आए थे और जदयू में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में इस प्रस्ताव को नकार दिया।
“लालू कहेंगे डूबना है, तो डूबेंगे”
भाई वीरेंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा,
“हमारे नेता लालू प्रसाद हैं। वह कहेंगे यहां डूबना है, तो हम डूब जाएंगे। हमें न मंत्री बनना है, न पैसा चाहिए। हम उनके साथ थे, हैं और रहेंगे।”
उन्होंने यह भी बताया कि जब 22 में से 13 विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार थे, तब भी वह राजद के साथ अडिग खड़े रहे।
दानिश रिजवान का खंडन
इस गंभीर आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने भाई वीरेंद्र के बयान को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:
“यह बात 2014 की है, जब नीतीश कुमार के प्रति आस्था रखने वाले कई राजद विधायकों से बातचीत चल रही थी। लेकिन किसी भी तरह के पैसे के लेन-देन की बात पूरी तरह गलत है।”
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गरमाहट
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान अब बस कुछ ही दिनों में होने वाला है। ऐसे में राजद विधायक का यह खुलासा सियासी तापमान बढ़ा सकता है। यह बयान राजद को अपने मजबूत आधार वाले नेताओं को जनता के सामने दिखाने का मौका भी देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान जहां राजद की वफादारी की छवि को मजबूत करता है, वहीं विपक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।



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