कोल इंडिया का बड़ा फैसला: विजिलेंस में ‘सेंसर’ की सजा मिली तो नहीं मिलेगा पीआरपी का लाभ

👉अधिकारियों के लिए सख्त नियम लागू, विजिलेंस दंड का सीधा असर पड़ेगा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन पर
👉 अब ‘निंदा’ की सजा भी पड़ेगी भारी, कोल इंडिया ने पीआरपी नियमों में किया अहम संशोधन
धनबाद: कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपने अधिकारियों के लिए प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (Performance Related Pay-PRP) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा जारी नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी को किसी विजिलेंस (सतर्कता) मामले में “निंदा (Censure)” की सजा दी जाती है, तो वह संबंधित अवधि के लिए पीआरपी का लाभ पाने का पात्र नहीं होगा। इस निर्णय को कंपनी में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब तक “सेंसर” को अपेक्षाकृत हल्की अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जाता था, लेकिन नए नियम के बाद इसका सीधा असर अधिकारियों के आर्थिक लाभ पर भी पड़ेगा। इससे स्पष्ट संकेत गया है कि कोल इंडिया भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से ले रही है।
👉प्रदर्शन के साथ आचरण भी होगा अहम
कंपनी के नए निर्देशों के अनुसार केवल कार्य प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि अधिकारी का आचरण, ईमानदारी और सेवा अनुशासन भी पीआरपी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि किसी अधिकारी पर विजिलेंस जांच के बाद “सेंसर” जैसी सजा लागू होती है, तो उसके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उसे प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी।
👉 जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम
कोल इंडिया प्रबंधन का मानना है कि इस बदलाव से अधिकारियों में जवाबदेही की भावना मजबूत होगी और वे नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे। साथ ही, कार्य संस्कृति में पारदर्शिता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा। कंपनी का उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ स्वच्छ प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
👉 अधिकारियों पर पड़ेगा सीधा असर
इस संशोधन का प्रभाव कोल इंडिया और उसकी सभी अनुषंगी कंपनियों के अधिकारियों पर पड़ेगा। जिन अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, उन्हें अब केवल विभागीय दंड ही नहीं बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इस फैसले के बाद अधिकारी सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के पालन को लेकर पहले से अधिक सतर्क रहेंगे।
कोल इंडिया का यह फैसला सार्वजनिक उपक्रमों में पारदर्शी और जवाबदेह कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे ईमानदार और बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं नियमों की अनदेखी करने वालों के लिए यह कड़ा संदेश भी साबित होगा।


Subscribe to my channel